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No Vote for Hillary

द्वारा : Mahendra Yadav    

लेखक : Mahendra Yadav
हिलेरी क्लिंटन को वोट देने की ज़रूरत नहीं है।हिलेरी को इस बात का फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है कि वो अमेरिका की पहली
महिला राष्ट्रपति बन सकती है। ये बात सही है लेकिन अमेरिका के माहौल को ध्यान में रखें तो वहां महिला और पुरुष के बीच राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर ज्यादा भेदभाव नहीं है। भेदभाव तो श्वेतों और अश्वेतों के बीच है। बराक ओबामा के रूप में इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी का एक सक्षम उम्मीदवार सामने है। बराक सक्षम भी हैं और अमेरिका को नई दिशा में ले जाने की सोच भी उनके अंदर दिखती है। सिर्फ महिला होने के नाते अगर हिलेरी को वोट दिए गए, तो अमेरिका पहली बार किसी अश्वेत को राष्ट्रपति बनाने के मौके से चूक जाएगा।
वैसे भी हिलेरी ऐसे संकेत दे चुकी हैं कि वो ज्यादातर अपने पति और पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की नीतियों को ही आगे बढ़ाएंगी। ऐसे में उनसे नयी क्या उम्मीद रखी जाए।
सामाजिक परिवर्तन के हिसाब से किसी अश्वेत का अमेरिका का राष्ट्रपति बनना, किसी महिला के राष्ट्रपति बनने से ज्यादा बड़ी घटना होगी। ये नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका में अब भी नस्लवाद काफी गहरी जड़ें जमाए है और इसी वजह से अब तक कोई अश्वेत वहां का राष्ट्रपति नहीं बन सका है। हिलेरी को वोट न देने की मेरी अपील किसी तरह का नकारात्मक प्रचार नहीं है। किसी सक्षम अश्वेत प्रत्याशी के सामने न होने की सूरत में उनका समर्थन किया जा सकता था, चाहे उनकी योग्यता को ध्यान में रखा जाए या सिर्फ महिला होने को। अमेरिकी जनता को ये बहुत अच्छा मौका मिला है,जिसके जरिए वो एक अश्वेत को देश का मुखिया बना सकते हैं।फिर बराक ओबामा की अपनी काबिलियत एक बहुत बड़ी अतिरिक्त खूबी तो है ही। तो ध्यान रखिए, बराक ओबामा को ज्यादा वरीयता देना मानवता के हित में हैं, इसलिए हिलेरी क्लिंटन को इस बार सिर्फ इंतजार करने दीजिए।
प्रकाशन तिथि: मार्च 04, 2007
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