किशोरावस्था (adolescence) - बाल्यावस्था (childhood) एवं युवावस्था (youth) के बीच का वह नाजुक
और कमसिन मोड़ है जो परिवर्तनों (transformation) का एक सैलाब लाता है। यह बदलाव शारीरिक (बाह्य एवं आन्तरिक) व मानसिक होते हैं। अपने शरीर को लेकर लाखों 'क्यों और कैसे' जैसे उठते प्रश्नों के उत्तर संकोच व् भयवश किसी विश्वसनीय माध्यम से जानने के बजाय सस्ते साहित्य , यार-दोस्त , सी-ग्रेड फिल्म्स और 'Porn' माध्यमो से प्राप्त कर किशोर एक भूल-भुल्लैया में फँस जाते हैं और हर तरह से अपना नुक्सान करते हैं।
किशोरावस्था की अनेक उलझनों में सबसे बड़ी है ' हस्थमैथुन (Masterbation) की। हस्थमैथुन यानि अप्रक्र्तिक रूप से लिंगोत्तेजना (sensation) प्रकट कर वीर्य का स्खलन करना। भारत में यह समस्या किशोरियों के मुकाबले किशोरों में कहीं ज्यादा है। समस्या तब और भी गंभीर हो जाती है जब हस्थमैथुन एक लत, एक जूनून, एक रोग, और सत्य से मुह फेरकर दिवास्वप्न (fantasy) में डूबे रहने का साधन बन जाता है। सुनी सुनाई बातों और किताबो में पढ़कर मिले ज्ञान के बल पर इस कमसिन उम्र को पार करना आगे चलकर आत्मग्लानि, अपराधबोध और हीनता को जन्म देता है। बहुतेक शीघ्र-पतन और लिंगोत्थान (erection) के अभाव में विवाह के नाम मात्र से काँप उठते हैं। अतिसंवेदनशील एवं अवसादग्रस्त किशोर तो आत्मघात तक कर लेते हैं।
हस्थमैथुन और भ्रांतिया :
- हस्थमैथुन से शरीर का कमजोर होना और तेज में कमी आना, आँखों का धसना एवं उनके नीचे कालिमा आना, गालो का धसना , वीर्य का कम और पतला होना , शीघ्र-पतन , वंशवृद्धि में असमर्थता एवं स्थाई नपुंसकता (Permanent impotency) होना इत्यादि हैं ।
- हस्थमैथुन करने वाला एक तरह का निन्दित, निकृष्ट एवं हेय कृत्य करता है।
- वीर्य का स्खलित होना ओज को कम करता है एवं शरीर एवं मन को दुर्बल करता है।
- इससे संकल्प शक्ति का ह्रास होता है।
- यह बचपन में की हुई भूल है जिसका खामियाजा बड़े होने पर भुगतना पड़ता है।
- इससे वैवाहिक जीवन में कई दिक्कतें आती हैं जैसे- पत्नी को संतुष्ट न कर पाना, शीघ्र पतन, स्वप्न दोष, लिंग का छोटा एवं पतला होना, वीर्य का कम एवं पतला होना, शुक्रानुओ की संख्या में कमी होना इत्यादि।
ऊपर लिखी सारी बातें आपको सस्ते साहित्य में मिल जायेंगी और उनका समाधान करने वालो के विज्ञापन भी। जब रोग झूठा हो तो उपचार भी झूठा ही होगा न। जिस तरह विधुत के सही इस्तेमाल से आप रौशनी पाते हैं व् ग़लत से दुर्घटना वैसे ही हस्थमैथुन के विषय में सही जानकारी हो तो आप किशोरावस्था में आने वाले तूफानों का भी आनंद ले सकेंगे और तनाव मुक्त रह सकेंगे लेकिन जानकारी ग़लत हो तो भटकाव निश्चित है।
सेक्स सम्बन्धी विशेषज्ञ इसे एकदम स्वाभाविक व्यवहार (normal behavior) मानते हैं। जिस तरह जल का नीचे की तरफ़ बहना गुन है वैसे ही वीर्य का स्खलित होना। मैथुन से न सही तो स्वप्न दोष से होगा। किसी भी रूप में हो ग्लानी एवं अपराधबोध निराधार है। विशेषग्य इसे एक अच्छा तनाव रोधी मानते है। इसे करते हुए ग्लानी और अपराध बोध की बजाय आनंद और क्रियात्मकता को स्थान दे।
महत्त्वपूर्ण बातें:
इस विषय में सबसे महत्वपूर्ण बात है - 'अति-उत्तेजना हानिकारक है'
हस्थमैथुन अति-उत्तेजना में किया जाए तो इससे शीघ्रपतन का खतरा है। कुछ लोगों में यही आदत विवाह के पश्चात भी बनी रहती है और वे शर्मिंदा होते हैं। अति-उत्तेजना से लिंग को चोट (injury) भी लग सकती है। नसों पर अधिक दवाब पड़ सकता है। किसी तरह के स्प्रे, तेल, दावा, जडी-बूटी का सेवन न करे। सेक्स शक्ति बढ़ाने की कोइ दवा नही है। अगर आप Viagara का नाम ले तो याद रखिये आप विसंगतियों को आमंत्रण दे रहे हैं और फिर दवा के नियमित उपयोग से आप इसके आदि (habitual) हो जायेंगे और फिर बिना दवा के सक्रीय न हो सकेंगे। आप नीम-हकीम के चक्कर में कही नपुंसकता को बुलावा तो नही दे रहे हैं।
फूटपाथ पर बिकने वाले सस्ते साहित्य से बचे। फिल्मे देखकर किसी कास्सिनोवा (Casanova) या सुपरमैन (Superman) की भ्रान्ति न पाले। यदि किसी तरह की लिंग व् सेक्स सम्बन्धी शंका या समस्या है तो सीधे किसी विशेषज्ञ से मिले। यदि किसी तरह का डर, ग्लानी, या विवाह के पश्चात आने वाली किसी समस्या का डर है तो तुंरत किसी मनोचिकित्सक से मिले। आर्श्चय नही की आपकी ये सारी समस्याएँ मनोवैज्ञानिक (psychological) हो और न की शारीरिक (physical)।
"अति सर्वत्र वर्जयेत" - अति हर हालत में हानिकारक है। कहीं ऐसा तो नही की आप हर वक्त, दिन रात किसी दिवास्वप्न (fantasy) में जीते हैं और हस्थमैथुन आपके दिलो-दिमाग पर छाया रहता है। यदि है तो उससे बाहर आए। हर काम का वक़्त होता है। किशोरावस्था में बहुत कुछ और भी है जहाँ आप अपना मन लगा सकते हैं। पढ़ाई , खेल, फिल्मे, दोस्त, परिवार, कला इत्यादि।