और बातों-बातों में हो जाएगा सिलेक्शन रिक्रूटर्स
के लिए ग्रुप डिस्कशन चयन का अच्छा औजार होता है। ऐसे में जीडी की तैयारी की अनदेखी नहीं की जा सकती।
जब रिक्रूटर्स कैंपस में जॉब प्लेसमंट के लिए आते हैं, तो सिलेक्शन के लिए ग्रुप डिस्कशन को अहम आधार बनाया जाता है। यह ऐसा तरीका है, जिससे काफी कम समय में अधिक से अधिक स्टूडंट्स को परखा जा सकता है। ऐसे में स्टूडंट्स को जीडी की तैयारी करते समय यह समझना चाहिए कि रिक्रूटर्स उनसे चाहते क्या हैं? इससे आगे का रास्ता काफी आसान हो जाएगा।
कम्यूनिकेशन स्किल किसी भी स्टूडंट में रिक्रूटर्स की पहली दिलचस्पी उसके कम्यूनिकेशन स्किल को देखने के बाद पैदा होती है। वे इस बात पर ध्यान देते हैं कि स्टूडेंट में कितना आत्मविश्वास है और वह अपनी बातों को कितने स्पष्ट ढंग से समझा सकता है? आजकल लगभग सभी जॉब्स में, विशेषकर मैनिजर जैसे पदों के लिए बेहतर कम्यूनिकेशन स्किल का होना आवश्यक हो गया है। हालांकि स्टूडंट्स के बीच एक गलतफहमी है कि अच्छे कम्यूनिकेशन स्किल का मतलब सिर्फ अंग्रेजी में सही ढंग से बात करना है, जबकि वास्तविकता इससे काफी अलग है। आप जो भी बोलें, वह प्रभावपूर्ण तरीके से बोलना चाहिए। कुछ इस तरह कि सामने वाला आपकी बातों पर तो ध्यान दे ही, आपके व्यक्तित्व का भी कायल हो जाए।
अलग सोच हर कंपनी ऐसे लोगों को रिक्रूट करना चाहती है, जिनकी अपनी अलग सोच हो। साथ ही, वे अपनी उम्दा सोच को सही ढंग से व्यक्त करने और उसके अनुसार काम करने की क्षमता भी रखते हों। सच तो यह है कि स्पष्ट सोच से ही साफ और सटीक बात निकल सकती है।
विश्लेषण की क्षमता ग्रुप डिस्कशन में आमतौर पर ऐसे ही टॉपिक दिए जाते हैं, जिनमें विभिन्न तरह की सूचनाओं को जोड़कर उनका विश्लेषण करना होता है। इससे रिक्रूटर्स को विश्लेषण करने की आपके क्षमताओं का विस्तार से पता चल जाता है। उदाहरण के लिए मान लीजिए, आपको यह टॉपिक दिया जाए कि स्मोकिंग को पब्लिक प्लेस में बैन करना सही है या गलत? इस पर डिस्कशन करते समय आपको इससे जुड़े तमाम पहलुओं को शामिल करना होगा, जैसे - मेडिकल, लीगल, राइट टु चॉइस फॉर स्मोकर्स, राइट टु क्लीन एअर फॉर नॉन स्मोकर्स आदि। साथ ही, इस नियम को लागू कराने में होने वाली कठिनाइयों और तंबाकू उद्योग में रोजगार पर भी फोकस करना होगा।
व्यक्तिगत गुण कभी-कभी आपको अपने साथी के साथ भी डिस्कशन करना पड़ सकता है। ऐसे में रिक्रूटर्स यह देखना चाहते हैं कि आप जब कंपनी में अपने कलीग्स या कस्टमर्स से बात करेंगे, तो कितने कूल रह सकते हैं? इससे आपके
धैर्य की परीक्षा भी होती है।
नेतृत्व क्षमता क्या आपके अंदर लीडरशिप क्वॉलिटी है? क्या आप जो कहते हैं, उसे महसूस कर सकते हैं? क्या आप ऐसी परिस्थिति में भी निर्णय लेने में सक्षम हैं, जब आपके साथ काम करने वाला हर कोई अनिश्चित हो? क्या आपको लाइमलाइट में रहना पसंद है या फिर आप टीम को साथ रखने में यकीन करते हैं? ये ऐसे सवाल हैं, जो रिक्रूटर्स के दिमाग में हो सकते हैं, इसलिए इन सभी सवालों की तैयारी पहले ही कर लेनी चाहिए।