सिर्फ चीख-चिल्लाहट नहीं है जीडी ग्रुप डिस्कशन के समय
हर कोई खुद को ऊपर रखना चाहता है और इस कीमती समय को यूं ही जाया कर देता है। आइए, जीडी को बारी-बारी से समझते हैं।
आमतौर से किसी भी
ग्रुप डिस्कशन में 10 प्रतिभागी होते हैं, जिन्हें कुल मिलाकर 10 मिनट का समय दिया जाता है। सच तो यह है कि किसी भी डिस्कशन को दिलचस्प होने के साथ प्रॉडक्टिव भी होना चाहिए। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जीडी बिना किसी निर्णय के सिर्फ चीख-चिल्लाहट के साथ खत्म हो जाता है। जीडी में
आपकी परफॉरमंस खराब न हो, इसके लिए इस चार हिस्सों में बांटकर समझते हैं :
पहला फेज: शुरुआती कठिनाई यह फेज जीडी के पहले या दूसरे मिनट का होता है। इस दौरान स्टूडेंट्स के बीच झिझक बनी रहती है, लेकिन रिक्रूटर तब तक ग्रुप को टॉपिक दे चुका होता है। आपकी परफॉरमंस तीन संभावनाओं पर निर्भर करती है। पहला, आपके पास इस विषय के बारे में काफी जानकारी हो। दूसरा, आपके पास थोड़ी जानकारी हो, जिससे आप शुरुआत करने में झिझकें और तीसरा, आपके पास कोई भी जानकारी न हो।
फेज दो: सभी की भागीदारी एक बार डिस्कशन शुरू होने के बाद कोई भी स्टूडेंट पीछे नहीं रहना चाहता। जीडी में भाग लेने वाला हर स्टूडंट दूसरे की बात से या तो सहमति जताता है या असहमति। देखा जाता है कि एग्रेसिव स्टूडेंट्स जीडी में डॉमिनेट करते हैं। कुछ ऐसे होते हैं, जिनका योगदान कुछ शब्दों का ही होता है। कुछ ऐसे भी होते हैं, जो जीडी में शामिल तो होते हैं, लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं मिल पाता। ज्यादातर स्टूडंट्स की यह मंशा होती है कि जो टॉपिक चल रहा है, उसी पर सभी की सहमति बन जाए।
फेज तीन: उफान पर
यह फेज जीडी की समाप्ति से पहले एक या दो मिनट का होता है। इस समय तक एग्रेसिव स्टूडंट्स धीरे-धीरे ढीले हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि उन्होंने जो फंडू पॉइंट्स उठाए थे, उनसे रिक्रूटर्स पर काफी प्रभाव पड़ चुका है। थोड़ा-बहुत बोलने वालों को लगता है कि उन्होंने भी कुछ शब्द तो जरूर जोड़े हैं।
फेज चार: जीडी की समाप्ति जब रिक्रूटर्स जीडी की समाप्ति का सिग्नल देते हैं, तो सभी को लगता है कि चलो, अब अग्निपरीक्षा खत्म हुई। इस समय तक स्टूडंट्स सामान्य हो जाते हैं। अक्सर ऐसे कई ऐंगल्स का भी पता चलता है, जिन पर डिस्कशन होना चाहिए था।
पद्मजा श्रीनिवास