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ऑफिस में लग न जाए 'रोग'

द्वारा : pratima avasthi    

लेखक : pratima
ऑफिस में लग न जाए 'रोग' 
ऑफिस में कई बार ऐसी आदतें
आपको जकड़ लेती हैं, जिनके बारे में आपने न सुना होता है और न ही आपको इनका अहसास हो पाता है। इसके बावजूद ये आदतें इस हद तक आप
के व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती हैं कि तब इन्हें 'सिंड्रोम' कहना ज्यादा सही रहता है। समय रहते नहीं संभलने पर इनका बुरा असर आपके करियर पर भी पड़ सकता है। जानते हैं ऐसी कुछ आदतों के बारे में :
छुट्टी लेने के लिए
निजी या सरकारी फर्म में काम करने वाले लोग काफी तादाद में इसके शिकार हो सकते हैं। विशेषकर वे, जो छुट्टी पर जाने की सोच रहे हैं। इस सिंड्रोम को 'द हॉलिडे गिल्ट सिंड्रोम' कहा गया है। अगर योजना बनाकर छुट्टी नहीं ली जाए, तो आपकी छवि कंपनी और बॉस के सामने खराब हो सकती है। होता यह है कि जब आप छुट्टी लेने के लिए बॉस से कहते हैं, उस समय आपके पास कई असाइनमेंट्स हो सकते हैं। कंपनी के फायदे और करियर के लिहाज से भी इन्हें पूर्ण करना जरूरी होता है। ऐसे में अगर आप इन्हें पूरा करने के लिए रुकेंगे, तो छुट्टी लेने का वक्त निकल जाएगा। बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि बॉस को अपनी छुट्टी के विषय में जितना पहले हो सके, बता दें। इससे काम खत्म करने में आसानी होगी। अगर कोई प्रोजेक्ट बाकी है, तो इसके लिए ई-मेल से सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
काम निबटाने की जल्दबाजी
यह हकीकत है कि हम अपने सभी कामों को जल्द से जल्द निबटाना पसंद करते हैं। इसके लिए अपने सभी असाइनमेंट्स सुबह ही समाप्त कर देना चाहते हैं। बाद में जब हमारे पास काम नहीं होता तो दोपहर से ही घर जाने के विषय में सोचने भी लग जाते हैं, पर ड्यूटी ऑफ होने से पहले जा भी नहीं सकते। इसी का परिणाम होता है तनाव। इससे जुड़ी सिंड्रोम को कहते हैं 'द ऑफ्टरनून यान सिस्टा'। अगर ऐसी ही परिस्थितियां आपके साथ भी बन रही हैं, तो समझ लें कि आपको यह लत लग चुकी है।
दरअसल, होता यह है कि सुबह काम का अधिक बोझ उठा लेने से आप थक जाते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि एक या दो बजे के बाद ही आप घड़ी की ओर बार-बार देखने लगते हैं। इससे बचने का आसान तरीका है कि कुछ असाइनमेंट्स दोपहर के लिए भी जरूर रखें। अगर थकान महसूस हो, तो थोड़ा ब्रेक लें, कॉफी या बिस्कुट खाएं। इससे आपके शरीर को ऊर्जा मिलेगी और आप शाम तक बिजी रहेंगे।
जल्दबाजी
से घबराएं नहीं
इस लत से ग्रसित लोगों की संख्या भी काफी है। यह उस समय शुरू होती है, जब कोई ऐसा कार्य आपके जिम्मे आ जाता है, जिसमें आपकी दिलचस्पी नहीं है। 'डे ऑफ्टर टुमोरो डिस्ऑर्डर' की यह स्थिति तब और भी भयानक हो जाती है, जब कई दिनों की कोशिशों के बाद भी काम नहीं निबटता। ऐसे में आदमी डिप्रेस्ड भी हो सकता है। समय बीतने के साथ ही काम समाप्त करने की डेडलाइन भी नजदीक आ जाती है। बेहतर होगा कि आप प्रोजेक्ट को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट लें।
घर को ऑफिस न बनाएं
' ब्रिंग होम वर्क सिंड्रोम' की शिकायत अधिकतर गृहणियां अपने पति के लिए करती हैं। वे कहती हैं कि अक्सर ज्यादा काम की वजह से पति घर को ही ऑफिस बना देते हैं। हद तो तब हो जाती है, जब वीकेंड के दिन भी काम से छुटकारा नहीं मिलता और घर में हमेशा तनाव बना रहता है। हकीकत यह है कि इसका इलाज भी आपके ही हाथों में है। आप घर का माहौल कैसा चाहते हैं, यह निर्णय आपको ही करना है। घर में खुशहाली बनी रहे और टेंशन भी कम हो, इसके लिए यह जरूरी है कि ऑफिस के काम और तनाव को वहीं छोड़कर आएं।
प्रकाशन तिथि: नवम्बर 01, 2008
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