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नई शुरुआत करने में हिचक कैसी!

द्वारा : pratima avasthi     

लेखक : श्रीप्रकाश श्रीधर
नई शुरुआत करने में हिचक कैसी! 

जब कोई व्यक्ति
किसी नए काम में सफलता हासिल करता है, तो पूरा समाज उसकी उपलब्धियों का बखान करने लगता है। यदि वह अपने उद्यम में असफल रहता है तो उसे दुनिया भर से सलाह मिलने लगती है। हम ऐसे माहौल में रह रहे हैं जहां सिर्फ उपलब्धियों को मान्यता मिलती है और असफल लोगों को रेस से बाहर कर दिया जाता है। जब हमने अपना कंसल्टिंग बिजनेस शुरू किया, तो पहले-पहल कुछ ग्राहक मेरी कॉल्स को नजरअंदाज कर देते। मेरे एक साझेदार ने मुझे अपनी कार्यशैली बदलने का सुझाव देते हुए दो-टूक कहा कि यदि मैंने अगले कुछ हफ्तों में नतीजे नहीं दिए तो वह मुझसे बिजनेस छोड़ने के बारे में भी कह सकता है।
बिजनेस डेवलपमेंट प्रोफेशनल्स के तौर पर एक बात मैंने जानी कि जो भी आप पाना चाहते हैं उसे कुछ अलग ढंग से करें, उसमें निरंतरता बनाए रखें और अपने इरादों पर अटल रहें। आपके समक्ष कोई भी चीज चांदी के थाल में सजकर नहीं आती, शुरुआत में हर किसी को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। मेरे साथ भी धीरे-धीरे लोग जुड़ने लगे और इसके लिए बाद में मुझे तारीफें भी मिलीं।
ज्यादातर लोग कुछ नया करने से पहले ही मन में यह भय पाल लेते हैं कि असफलता की सूरत में दूसरे लोग (खासकर आलोचक) उनके बारे में क्या कहेंगे। यदि थॉमस अल्वा एडीसन भी इसी तरह सोचते, तो हम अपनी रोजमर्रा की कुछ बुनियादी सुविधाओं से महरूम रह जाते। लीडर के तौर पर लोगों को जोखिम उठाने हेतु प्रेरित करें और नाकामियों के प्रति निष्ठुर न बनें। यदि आप नाकामी से बचने की कोशिश करते हैं, तो जीवन में कभी कोई बड़ा काम नहीं कर सकते।
-लेखक नेतृत्व प्रशिक्षण संस्था ‘लीडकैप’ के संस्थापक हैं।
प्रकाशन तिथि: अक्तूबर 31, 2008

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