कौन कहता है कि...भूत नहीं होते?
भूतों को कई बार देखा है मैने, याद करों...आपने भी जरुर देखा है।
हम सपनों की बात नहीं कर रहे यारों;
खुली आंखों से हम सब ने उन्हे देखा है।
उनकी तारीफ की है हमने खुले दिलसे...
उनको सिर-आंखों पर भी बैठाया है।
सदियों पुराना चला आ रहा उनका डर...
अब तो बच्चों ने भी मन से मिटाया है।
उनकी नकल करने लगे है छोटे-बडे सभी....
डराने के लिए नकली भूत बन, घुम रहे है।
पर ..असली भूतों का कभी कुछ तो सोचो....
जो इन्सानों के डर से, छिपते फिर रहे है।
कभी शाहरुख खान, तो कभी अमिताभ बच्चन..
कभी संजय दत्त....तो कभी नसीरुद्दीन शाह।
भूत बन कर नाच रहा ये कलाकारों का झुंड...
हमने तो इन्हे ही भूत मान लिया...भाई वाह।
तो क्या सोचा आपने?..सोच के बताइए..
क्या इन्हे ही भूत मान लिया जाए?
या असली भूतों को सामने लाकर...
इन सब की बोलती बंद कर दी जाए?