Mumbai Ubal Raha Hai!
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प्रकाशन तिथि: फरवरी 05, 2008
राजनीति मुंबई उबल रहा है!
कभी सुना था कि ' रोम जल रहा है'...और अब कहना पड़ेगा कि 'मुंबई उबल रहा है'....बेचारे मुंबईकर मुश्किलसे चैन की सांस बीच बीच में ले ही रहे होते है कि उन्हें नई मुसीबत आ कर धर-दबोचती है. ऐसा एक नहीं, अनेक बार हुआ है.
यह कहना न होगा कि मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी है.जाहिर है कि महाराष्ट्रियनों की बहुतायत होगी ही. इसके बावजूद भी भारत के विविध राज्यों से यहां आ कर बसने वाले और बड़े छोटे बड़े कामधंदे करनें वालों की भी तादाद बड़ी है. कई कई सालों से यहां रहते होने की वजह से ये लोग अपने आप को मुंबईकर ही समझतें है.
ऐसे में इन दूसरे राज्यों से मुंबई आ कर बसे हुए लोगों से यह कहना कि 'तुम तो परप्रांतीय हो...' सरासर ग़लत है.ये कहने का मतलब साफ है कि यहां रहने का और कमाई करनेका परप्रांतीयों का कोई हक नहीं बनता!....और यह कह रहे है,राज ठाकरे!
राज ठाकरे,महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना नामक एक राजकीय पार्टी के अध्यक्ष है. राज ठाकरे सिर्फ अपना बयान दे कर चुपकी साध लेते तो भी ठीक था...लेकिन उन्हों ने मुंबई में एक ऐसा तहलका, एक ऐसा कहर मचाया कि मुंबई की जड़े तक हिला कर रख दी. उनके पार्टी वर्करों ने मुंबई में, दादर में जहां टैक्सीवालों को निशाना बनाया वहां कल्याण की घटना को दोहराते हुए दादर रेल्वे स्टेशन पर लोकल ट्रेनों में उत्तर भारतीय लोगों की जम कर धुनाई भी की.
रात के समय जग प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन के जुहू स्थित 'प्रतीक्षा' बंगले पर, मोटरसाइकिल पर सवार दो गुंडों ने बोतल भी फेंकी थी. इस तरह गुंडा गर्दी को देखते हुए महाराष्ट्र की सरकार का सुरक्षा बढाने का दावा झूठा साबित हो रहा है. फिलहाल तो पुलिस ने राज और अमिताभ के बंगलों की सुरक्षा का पूरा इंतज़ाम किया हुआ है.
वैसे राज ठाकरे का कहना है कि अमिताभ के बंगले पर उनके समर्थकों ने हमला नहीं किया है..और वे जानते तक नहीं कि अमिताभ के बंगले पर हमला हुआ है. अब अगर उनकी उग्र बयान बाजी की आड़ में किसी दूसरे विरोधी दल ने बहते पानी में हाथ साफ किए भी है...तो भी शुरुआत तो राज ठाकरे के ग़लत बयान से ही हुई है.
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री आर.आर.पाटील ने कहा है कि मुंबई में लाठी और तलवार के खेल खेलने वालों को तड़ीपार किया जाएगा.
... अब एक नज़र समाज पर डालनी भी जरुरी है. भारत में अब कोई भी प्रांत किसी एक कम्युनिटी का रहा नहीं है. यू.पी.में सिर्फ उत्तरप्रदेशी ही रह रहे हो, पंजाब में सिर्फ पंजाबी ही रहते हो या बिहार में बिहारी ही रह रहे हो...ऐसा नहीं है. भारत में भारतीय होने के नाते कोई पढाई या कामधंदे की तलाश में दूसरे राज्यों मे जा सकता है. वहां जा कर ऊंचे ओहदे पर भी पहुंच सकता है और बेसुमार धन भी कमा सकता है. आज मुंबई की फिल्म इंड्स्ट्री इसका ज्वलंत उदाहरण है.यहां किसी एक कोम के या धर्म के लोगों का सामाज्य नहीं है...यहां विविधता है. विविध प्रांतो के और धर्मो के व्यक्ति अपना एक मुकाम हासिल कर चुके है.यहां प्रतिस्पर्धा के बावजूद भी एकता बनी हुई है.
राजकीय नेताओं को चाहिए की देश शांति का भंग करने वाले भडकाउ बयान देने से बचें. सामान्य जन अगर उन्हें भगवान समझ कर उनकी आञा का पालन करतें है, तो वे आञा भी जनहित में ही दे!