खुदी को कर बुलंद इतना... जब स्थितियां अनुकूल न हों,
तो सही वक्त का इंतजार करना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें। मुश्किल वक्त का प्रयोग खुद को मजबूत करने में करना चाहिए।
मौजूदा स्लो-डाउन से वैसे तो लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हुए हैं, पर कुछ चुनिंदा क्षेत्रों पर गंभीर असर पड़ा है। आईटी ऐसे ही गिने-चुने क्षेत्रों में से एक है। ज्यादातर आईटी कंपनियों ने न सिर्फ नए रिक्रूटमंट बंद कर दिए हैं, बल्कि कुछ पुराने एम्प्लॉइज को भी बाहर का रास्ता दिखा रही हैं।
कैंपस प्लेसमेंट के लिए जाने वाली आईटी कंपनियों की संख्या में इस साल कमी आई है।
नवीं मुंबई के एक कॉलिज से इसी साल बीई की डिग्री लेने वाले रोहित अय्यर (बदला हुआ नाम) बताते हैं, 'साल 2007 में कैंपस सिलेक्शन में मुझे एक जानी-मानी ग्लोबल बिजनस सोल्यूशन कंपनी ने नियुक्त कर लिया था। मुझे 2008 के मध्य तक जॉइन करना था, लेकिन इस बीच स्लो-डाउन आ गया और रिक्रूटर ने मुझसे संपर्क तक नहीं किया।' रवीश की भी कुछ ऐसी ही आपबीती है। उन्होंने बताया, 'मुझे 2007 में ही एक बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी ने रिक्रूट कर लिया था, लेकिन मेरी जॉइनिंग आज तक नहीं कराई गई है। मुझे फाइनल ईयर पूरा किए हुए भी पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन मेरी कहीं जॉइनिंग नहीं हुई है।'
एक समय आईटी सेक्टर को सबसे अधिक आकर्षक करिअर वाला माना जाता था, लेकिन आज यह काफी जोखिम वाला सेक्टर बनता हुआ दिखाई दे रहा है। मंदी की वजह से आईटी सेक्टर की जॉब्स में कमी आई है। वैसे, स्थिति पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। कई एक्स्पर्ट्स अभी भी आशान्वित हैं कि स्थिति फिर सुधरेगी। इस बीच वह स्टूडंट्स को धीरज रखने और अपने स्किल्स तेज करने की सलाह दे रहे हैं। वे सुझाव देते हैं कि स्टूडंट्स को इस समय आगे की पढ़ाई की योजना बना लेनी चाहिए। फ्रेशर्स के लिए तो यह काफी फायदेमंद रहेगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलिकॉम के फाइनल ईयर स्टूडंट सिद्घेश कृष्णन आगे की पढ़ाई की योजना बना रहे हैं। वह कहते हैं, 'स्लो-डाउन में भले ही जॉब न मिले, लेकिन आगे की पढ़ाई तो की ही जा सकती है। मास्टर्स डिग्री लेने के लिए यह समय सबसे सही है। मैंने अमेरिका और यूरोप की यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया है। अगले एक-दो साल में हालात सुधरने की उम्मीद है, तब स्किल्ड वर्कर्स की काफी मांग रहेगी। उन हालात का फायदा उठाने के लिए आज अपने स्किल्स शॉर्प कर लेने चाहिए।'
एक और फाइनल ईयर स्टूडेंट रोहित अय्यर भी स्वीकार करते हैं कि इस क्राइसिस ने अपनी कमियों को दूर करने का बेहतरीन मौका दिया है। वह कहते हैं, 'अगले दो सालों में भारत में आउटसोर्सिंग में वृद्घि होगी और माहौल काफी अच्छा हो जाएगा।'
कुल मिलाकर, आज का माहौल भले ही ठीक नहीं लग रहा हो, पर ज्यादातर स्टूडेंट्स इस बात पर सहमत हैं कि यह समय एक जगह रुकने का नहीं है, बल्कि खुद को ज्यादा स्किल्ड बनाने का है।