शासन सुधार शेरशाह ने एक जनहितकारी शासन प्रणाली की स्थापना की । शासन को सुविधाजनक प्रबन्ध के
लिए सारा साम्राज्य को ४७ भागों में बाँट दिया, जिसे प्रान्त कहा जाता है । प्रत्येक प्रान्त में एक फौजदार था जो सूबेदार होता था । प्रत्येक प्रान्त सरकार, परगनों तथा गाँव परगने में बँटे थे । सरकार में प्रमुख अधिकारी होते थे-शिकदार-ए-शिकदारा तथा मुन्सिफ-ए-मुन्सिफा । प्रथम सैन्य अधिकारी होता था, जबकि दूसरा दीवानी मुकदमों का फैसला देता था ।
शेरशाह के प्रशासनिक सुधार में महत्वपूर्ण स्थानों पर मजबूत किलों का निर्माण शामिल था । बिहार में रोहतास का किला निर्माण कर सुरेमान करारानी को बिहार का सुल्तान नियुक्त किया ।
ऐसा माना जाता है कि शेरशाह बंगाल पर अधिकार करने के बाद वह बिहार में पटना आया । एक दिन वह गंगा किनारे पर खड़ा था तो उसे यह जगह सामरिक महत्व की ओर ध्यान गया, उसने एक किले का निर्माण कराया । मौर्यों के पतन के बाद पटना पुनः प्रान्तीय राजधानी बनी, अतः आधुनिक पटना को शेरशाह द्वारा बसाया माना जाता है ।
भूमि व्यवस्था शेरशाह द्वारा भूमि व्यवस्था अत्यन्त ही उत्कृष्ट था । उसके शासनकाल के भू-विशेषज्ञ टोडरमल खत्री था ।
शेरशाह ने भूमि सुधार के लिए अनेक कार्य किए । भूमि की नाप कराई, भूमि को बीघों में बाँटा, उपज का १/३ भाग भूमिकर के लिए निर्धारित किया, अनाज एवं नकद दोनों रू में लेने की प्रणाली विकसित कराई । पट्टे पर मालगुजारी लिखने की व्यवस्था की गई । किसानों की सुविधा दी गई कि वह भूमिकर स्वयं राजकोष में जमा कर सकता था ।
सैन्य व्यवस्था शेरशाह ने एक सशक्त एवं अनुशासित सैन्य व्यवस्था का गठन किया । सेना में लड़ाकू एवं निपुण अफगानों एवं राजपूतों को भर्ती किया, लेकिन ज्यादा से ज्यादा अफगान ही थे । सेना का प्रत्येक भाग एक फौजदार के अधीन कर दिया गया । शेरशाह ने घोड़ा दागने की प्रथा शुरू थी । उसके पास डेढ़ लाख घुड़सवार, २५ हजार पैदल सेना थी । वह सैनिकों के प्रति नम्र लेकिन अनुशासन भंग करने वाले को कठोर दण्ड दिया करता था ।
न्याय व्यवस्था शेरशाह की न्यासी व्यवस्था अत्यन्त सुव्यवस्थित थी । शेरशाह के शासनकाल में माल और दीवानी के स्थानीय मामले की सुनवाई के लिए दौरा करने वाले मुंसिफ नियुक्त किये गये । प्रधान नगरों के काजियों के अलावा सरकार में एक प्रधान मुंसिफ भी रहता था जिसे अपील सुनने तथा मुंसिफों के कार्यों के निरीक्षण करने का अधिकार था ।
शेरशाह ने पुलिस एवं खुफिया विभाग की स्थापना की । शान्ति व्यवस्था के लिए शिकों में प्रधान शिकदार, परगनों में शिकदार तथा गाँवों में पटवारी थे । षड्यन्त्रों का पता लगाने के लिए खूफिया विभाग था ।
साहित्य, कला, एवं सांस्कृतिक भवन- शेरशाह के शासन काल में साहित्य, कला एवं सांस्कृतिक भवनों का संरक्षण एवं निर्माण हुआ । इसी के शासनकाल में मलिक मोहम्मद जायसी ने पद्मावत की रचना की । इसके शासनकाल में महदवी नेता शेख अलाई का शिक्षा विचार उल्लेखनीय है । इसके दरबार में अनेक प्रसिद्ध विद्वान मीर सैयद, मंझन, खान मोहम्मद, फरयूली और मुसान थे । इनके शासन में फारसी तथा हिन्दी का पूर्ण विकास हुआ ।
उसने अनेकों भवनों जिसमें रोहतासगढ़, सहरसा का दुर्ग प्रसिद्ध दुर्ग हैं । इस प्रकार शेरशाह ने अल्प अवधि में बंगाल से सिंह तक जाने वाली ५०० कोस लम्बी ग्रांड ट्रंक सड़क का निर्माण किया । आगरा से बुहारनपुर तक, आगरा से बयाना, मारवाड़, चित्तौड़ तक एवं लाहौर से मुल्तान तक ये उपर्युक्त चार सड़कों का निर्माण किया । शेरशाह ने अनेक सरायों (लगभग १,७००) का निर्माण किया । सरायों की देखभाल शिकदार करता था ।