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शेरशाह का राज्याभिषेक

द्वारा : raykeshray    

लेखक : raykesh

शेरशाह कन्‍नौज युद्ध की विजय के बाद वह कन्नौज में ही रहा और शुजात खाँ को
ग्वालियर विजय के लिए भेजा । वर्यजीद

गुर को हुमायूँ को बन्दी बनाकर लाने के लिए
भेजा । नसीर खाँ नुहानी को दिल्ली तथा सम्बलपुर का भार सौंप दिया ।


अन्ततः शेरशाह का १० जून, १५४० को आगरा में विधिवत्‌राज्याभिषेक हुआ । उसके बाद
१५४० ई. में लाहौर पर अधिकार कर लिया । बाद में ख्वास खाँ और हैबत खाँ ने पूरे
पंजाब पर अधिकार कर लिया । फलतः शेरशाह ने भारत में पुनः द्वितीय अफगान साम्राज्य
की स्थापना की । इतिहास में इसे सूरवंश के नाम से जाना जाता है । सिंहासन पर बैठते
समय शेरशाह ६८ वर्ष का हो चुका था और ५ वर्ष तक शासन सम्भालने के बाद मई १५४५ ई.
में उसकी मृत्यु हो गई ।


नूहानी सरदारों ने उनकी हत्या के लिए असफल कोशिश की और जब शेर खाँ ने उनको
नुसरतशाह के विरुद्ध युद्ध कर दिया और पराजित कर दिया। इस विजय ने बंगाल के सुल्तान
की महत्वाकांक्षी योजना को विफल कर दिया। बाबर के समय शेर खाँ हमेशा अधीनता का
प्रदर्शन करता रहा था परन्तु हुमायूँ के समय में अपना रुख बदलकर चुनार गढ़ को लेकर
प्रथम बार चुनार लेने की चेष्टा की तब उसे महमूद लोदी के प्रत्याक्रमण के कारण वहाँ
से जाना पड़ा। उसने हिन्दूबेग को सेना भेजकर शेर खाँ ने दुर्ग देने से साफ इनकार कर
दिया। फलतः एक युद्ध हुआ।


प्रकाशन तिथि: सितम्बर 05, 2008
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