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नेट यूजर्स की पसंद...ई-बुक्स!

द्वारा : ambalika    

लेखक : priyanka sen,ambalika

arial; mso-hansi-font-family: arial">नेट यूजर्स की पसंद...ई-बुक्स!


arial; mso-hansi-font-family: arial">एक बहुत अच्छी खबर है!...अब ई-बुक्स के लिए पाठकों की कमी नहीं है! ई-मेल भेजना, चैटिंग करना, ब्लॉग लिखना,फ्रैंड्स बनाना वगैरा तो नेटवर्किंग साइट्स पर चल ही रहा है; पर ऑनलाइन किताबें पढना भी एक ट्रेंड बनता जा रहा है!


arial; mso-hansi-font-family: arial">नेट से चिपके रहनेवाले किताबी कीडे अब फिक्शन,नॉन फिक्शन, राजनीतिक जीवनी, कविता,कहानी और...और भी बहुत कुछ ऑनलाइन पढ सकतें है.कारण यही है कि रोज रोज लाइब्रेरी जाना मुमकिन नहीं है!...इतना समय निकाल पाना आम लोगों के लिए मुश्किल काम बनता जा रहा है! पढने का शौक भी बर-करार रखना है, तो क्या किया जाए?....चिंता किस बात की है?...कंम्प्युटर तो सामने ही है!



ऑनलाइन आ जाइए और अपना यह शौक भी शौकसे पूरा कीजिए! ई-बुक्स लैपटॉप और आईपॉड पर डाउन लोड भी आप कर सकतें है! ऋषभ कहता है मैने नेट पर 'हैरी पॉटर और एंड द चैंबर ऑफ सीक्रेट्स' पढी है.... और भी मशहूर किताबे पढी है!....और तो और मैने स्वयं( अंबालिका)नेट पर जैफ्री आर्च का उपन्यास 'एज द क्रो फ्लाइज' पढ़ा है!


 
...यहां ऑन ला इन पर खूब वैराइटीज भी मिल जाती है! लोग यहां शैक्सपियर की किताबें भी पढ़ रहे है!ख्रर्चा भी यहां कम ही आता है!...बुक्स खरीदक पढ़ने में जाहीर है कि ज्यादा कीमत चुकानी पडती है!


...खैर कुछ लोगों का मानना है कि किताबे पढ़ने के लिए लंबे समय तक मॉनिटर पर आंखें गडाए बैठे रहने से आंखों को नुकसान पहुंचता है....लेकिन अब ये जो सिलसिला चल पडा है,वह तो फिल्-हाल थमने का नाम नहीं ले रहा!






प्रकाशन तिथि: मई 26, 2008

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