Sab kuchh bikta hai
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प्रकाशन तिथि: फरवरी 16, 2008
सब कुछ बिकता है
अगर आपके पास बिस्नस माइंड हो, तो कचरे जैसी चीस के भी खरीदार मिल जाते हैं।
कई अवसरों पर जो चीस हमारे लिए कचरा होती हो वही किसी दुसरे के लिए कच्चा माल हो जाती है। दूरदर्शी व्यवसाई आमतोर पर फैक्ट्रियों और उद्योगों से निकले इस तरह के अपसिष्टों का अधिकतम लाभ उठाने की कोशिश करते हैं। इसका उदाहरण यहाँ प्रस्तुत है:- गैस की भारी किल्लत झेल रहे भारत को ओमान सरकार से ओद्योगिक कोयले से गैस एक्स्चेंग का प्रस्ताव मिला है। भारतीय ओद्योगिक कोयले की गुढ़वत्ता कोई खास अच्छी नहीं होती है और इसमे राख की भारी मात्रा मौजूद होती है, इसके बाद भी ओमान सरकार इसको क्यों पाना चाहती है ? इसका एक बेहद ही रोचक जवाब है।गौरतलब है की हमारे कोयले मै राख का ऊँचा स्तर उर्जा उत्पादन में अच्छा नहीं माना जाता, लेकिन ओमान सरकार को उर्जा उत्पादन के लिए कोयला चाहिऐ ही नहीं। उर्जा के लिए वो तेल का उत्पादन करती है। दरअसल उच्च राख वाला कोयला व्यापक परिमाण में सीमेंट के उत्पादन मै महती भूमिका निभाता है। यही वजह है कि ओमान सरकार खराब कोयले के बदले हमे गैस देने के लिए बहुत उत्सुकता दिखा रही है। निश्चित रूप से ये दोनों सरकारों के लिए लाभ ही लाभ का सौदा है। सच्चाई तोये है की ओमान में कंस्ट्रक्शन ओद्योग का बाजार गरमाया हुआ है। ओमान ही क्यों दुबई और आस पास के बाजार भी इस द्रष्टि से काफी महत्वपूर्ण हो गए हैं। भवन निर्माण संबंधी उपकर्णो का विश्व का एक-तिहाई हिस्सा खाड़ी देशों मै स्थित है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं अगर ओमान हमारे निम्न्कोटी के कोयले में इतनी रूचि दर्शा रहा है। फंडा यह है की अगर आपके पास बिस्नस माइंड हो तो कचरे जैसी नाचीज़ के खरीदार भी मिल जाते हैं।