Microsoft ka Maha Offer..... Kyaa Baat Hai!
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प्रकाशन तिथि: फरवरी 04, 2008
बिजनेस माइक्रोसॉफ्ट का महा ऑफर...क्या बात है!
माइक्रोसॉफ्ट बेचारा इतना परेशान हो गया कि उसने इंटरनेट दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी याहू! को खरीदने की इच्छा जाहिर की है. लगता है कि साइबर स्पेस में गूगल के बजते हुए डंके और फैलती हुई हुकूमत से माइक्रोसॉफ्ट बहुत परेशान है. ऐसे में तुरुप का पत्ता चलने के सिवाय चारा ही क्या है?
..इसके लिए माइक्रोसॉफ्ट ने याहू बोर्ड को 44.6 अरब डॉलर ऑफर किए है.अब देखें ''''आगे, आगे होता है क्या!.. और याहू इस ऑफर क जवाब देता है क्या!''''..अगर याहू के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने अपनी सहमति की मुहर लगा दी तो यह इंटरनेट की दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी डील बन जाएगी!
...वैसे सुनने में आया है कि यह ऑफर इससे पहले भी माइक्रोसॉफ्ट कई बार, इस वेब पॉर्टल को भिजवा चुकी है...पर इस बार की ऑफर तो काफी मोटी रकम की है. इस बार उसका ऑफर याहू के एक शेयर को 31 डॉलर में खरीदने का है, जो गुरुवार के बंद भाव के आधार पर 62 फीसदी ज्यादा है.माइक्रोसॉफ्ट ने स्पष्ट तौर पर माना है कि यह सारी कवायद गूगल के बढ़तें कदमों को रोकने की है...लेकिन हाय! याहू ने अबतक अपनी चुप्पी बर-करार रखी हुई है.
..हकीकत यह है कि आज लगभग 60 प्रतिशत लोग इंटरनेट रिसर्च के लिए गूगल का इस्तेमाल करतें है. 20 प्रतिशत लोग याहू की ओर रुख करतें है.10 प्रतिशत एमएसएन लाइव सर्च का सहारा लेते है और बचे हुए 10 प्रतिशत लोग अन्य वेब साइट्स का इस्तेमाल करतें है.
वैसे इस डील का होना काफी मुश्किल नज़र आ रहा है. विश्लेषकों के अनुसार तो इस समय याहू! तंगी के दौर से गुज़र रहा है और ऐसे में यह ज्यादा कीमत की चाहत में गूगल से भी हाथ मिला सकता है.अगर माइक्रोसॉफ्ट याहू को खरीद भी लेता है, तो भी इस सौदे पर अमेरिकी सरकार की मुहर हासिल करने में कंपनी को बहुतसी दिक्कतों का सामना करना पड सकता है.साथ में एक और समस्या यह भी है कि दोनों कंपनियों का काम करने का तरीका भी भिन्न है. याहू के कर्मचारी इस बात को ले कर भी परेशान है.
...इंडियन एंगल को भी नज़र अंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए.याहू के रिसर्च प्रमुख प्रभाकर राघवन की कोशिशों का ही यह परिणाम है कि आज माइक्रोसॉफ्ट की नज़र याहू पर पड़ी है. याहू कंपनी अपने आप को ज्यादा फ्रैंडली और सोशल बना पाई है, इसमें हैदराबाद पब्लिक स्कूल और आईआईटी मद्रास के भूतपूर्व छात्र प्रभाकर राघवन का बहुत बड़ा हाथ है. इससे पहले राघवन अमेरिका के नामी विश्वविद्यालय, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर भी रह चुके है.
यह समाचार ३ फरवरी २००८ तक के है.