Aaiye..sariska mein baagh dekhane chalaten hai!
Summary rating: 5 stars
1 समीक्षा
विजिट्स:
12
शब्द:
300
प्रकाशन तिथि: मार्च 24, 2008
पर्यटन आइए....सरिस्का में बाघ देखने चलतें है!
राजस्थान तो लुभावना प्रदेश है ही...अब यहां के बाघ आपको लुभाने की फिराक में है! वर्ष 2004 में अभयारण्य में बाघों का वजूद खत्म होने की खबर से दुनियाभर में चिंता की लहर दौड गई थी.
अब प्रधानमंत्री कार्यालय नें देश के इस राष्टिय पशु को विलुप्त होने से बचाने की ठान ली है.सरिस्का में तीन बाघों को छोड़ने की योजना को हरी झंडी दिखा दी है. इन तीन बाघों में एक नर और दो मादाएं है. इन्हें राजस्थान के रणथंभौर में बसाया जाएगा. किसी समय अलवर के महाराजा की शिकार स्थली सरिस्का में इन बाघों को पांच से छह हेक्टेयर के बाड़े में रखा जाएगा.
प्राणी विञानी और अधिकारी इन्हें जंगलमें छोड़ने से पहले, इन पर नज़र के लिए ...इनकी गर्दन पर निगरानी पट्टा लगाएंगे.निगरानी पट्टा उपग्रह से जुड़ा हुआ होता है. इसके द्रारा इनके विचरण की हर गति-विधि का ध्यान रखा जाता है.
वर्ष 2004 में सरिस्का में जब सभी बाघ समाप्त हो गए थे, तब देश को पहली बार महसूस हुआ कि उसका बाघ संरक्षण कार्यक्रम विफल हो गया है.इसके बाद सभी बाघ अभयारण्यों से ख़बरें आने लगी कि बाघों की संख्या में तेजी से कमी आती जा रही है.इससे प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से एक टाइगर टास्क फोर्स का निर्माण किया गया और सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई तक को पता लगाने के कहा कि आखिर गड़बड़ी कहां है!
2006 में प्रोजेक्ट टाइगर को और अधिकार दिए गए और अवैध शिकारियों से निपटने के लिए ''वन्य प्राणी अपराध नियंत्रण ब्यूरो'' का गठन किया गया. पता चला कि भारत में बाघों की संख्या 3600 नहीं बल्कि 1411 है!
खैर! इन तीन बाघो को सरिस्का में बसाने का इंतजाम हो गया है और इस पर एक करोड़ 50 लाख रुपये खर्च होने वाले है!