Net Ka Durupayog...Manav Angon Ki Khuleaam Bikree!
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प्रकाशन तिथि: फरवरी 18, 2008
क्राइम नेट का दुरुपयोग...मानव अंगो की खुलेआम बिक्री!
यह चौकाने वाली खबर है; साथ ही समाज में चल रहे ऐसे गैर-कानूनी और मानवता के लिए अहितकारक काम करने वालों के प्रति, मन में घृणा भी पैदा होती है.
हालही ही में डॉ.अमित कुमार के किडनी रैकेट ने देश तो क्या दुनियाभर में सनसनी फैला दी है. यह तथा-कथित डॉक्टर और उसके कई सहयोगी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके है. ऐसे में ''''ऑन लाइन मानव अंग व्यापार'''' के दुनियाभर में फैलने की खबर भी प्रसारित हुई है. इतना ही नहीं, अंगदाता और खरीदार दोनों ही बेधड़क समान रुप से इसमें अपनी भागीदारी दर्ज करा रहे है.
मानव अंगो की ऑनलाइन बिक्री में कोई ऐसी वैसी नहीं बल्कि ऑरकुट और फेसबुक जैसी जानी मानी सामाजिक नेटवर्किंग साइट के नाम आने कम चौकाने वाली बात नहीं है. इन वेब साइटों पर स्थापित कानूनों का उल्लंघन करके मानव अंगो का व्यापार किया जा रहा है. जनहित के लिए काम करने वाली कई कम्युनिटी इनके ज़रिए बेचने और खरीदने का काम कर रही है. इस व्यापार में कहा जा रहा है कि हर तबक्के के लोग शामिल है. इसमें असलम जैसा 20 वर्षिय कॉलेज छात्र भी है और कुलकर्णी जैसा सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी है. पता नही कितनी बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन किडनी बाज़ार में शामिल है!
ऑरकुट पर करीब 700 सद्स्य कम्युनिटी ऐसी है जिसमें 35 किडनी प्रत्यारोपण के लिए काम कर रही है.फेसबुक साइट पर तो इससे भी आगे चल कर दुनियाभर में मिला कर हज़ारों में है.इसमें बड़ी संख्या मे भारतीय लोग भी शामिल होने की बात सामने आ चुकी है जो देश के माथे पर काल धब्बे के समान है.
ऑरकुट ने जाहिर कर दिया है कि उसने इस तरह की कम्युनिटी के कार्यों की समीक्षा की है और साइट पर से किडनी व्यापार करने वाली संस्थाओं को हटा भी दिया है.उन्हों ने यह भी बताया कि सिर्फ डोनर ही नहीं बल्कि खरीदार और उनके परिवारों की पूरी पहचान,फोन नंबर और ई-मेल एड्रेस के ज़रिए कम्युनिटी को सप्लाइ की जाती थी.
कमसे कम ऑरकुट की तरफ से तो इस तरह के गैर-कानूनी धंदे को रोका गया है, धन्यवाद!