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Kyon Hai ''Google'' Ka Jayjaykaar!

Summary rating: 5 stars 1 समीक्षा
लेखक : Hindustan, ambalika
Summary by : ambalika
विजिट्स: 44
शब्द: 600
प्रकाशन तिथि: फरवरी 10, 2008
आधा मज़ाक,पूरा सच!       ….क्यों है 'गूगल का जय-जयकार!
 
 
गूगल के नाम से आज कौन अपरिचित है?....लगता है कंप्यूटर का पर्याय शब्द ही कुछ दिनों बाद गूगल बन जाएगा. एक एड आती थी. आमिर खान कहता था,
' ठंडा मतलब, कोकाकोला!'  क्या?...'
 एक जमाना था जब घी का पर्याय शब्द भारत में 'डालडा' बन चुका था. घी का मतलब ही डालडा था.
एक बाबू ने अपने रसोईए से कहा,
"महाराज, रोटी पर आज से 'डालडा' लगाना बंद कर दो! मेरी नौकरी छूट गई है."
" डालडा तो मै अपनी रोटी पर लगा रहा हूं,साहबजी!...मेरी नौकरी तो चालू है.' रसोईए ने रोटी चोपडते हुए जवाब दिया.
 
कुछ ही वर्षों मे ऐसा डायलोग भी सुनाई देगा...मुन्ना अपने पापा से पूछ रहा है,
" पापा, आप इस बार मुझे बर्थ-डे गिफ्ट क्या दे रहे है?"
" क्या चाहिए तुम्हे?"  पापा कंप्यूटर पर आंखें गड़ाएं हुए है.
" पापा..देखिए, आपके पास भी है, ममा के पास भी है...लेकिन मेरे पास ही नहीं है." मुन्ना रुआंसा हो कर बोल रहा है.
" मुन्ने पहेलियां क्यों बुझा रहा है?...कह दे जो तुझे चाहिए!" पापा के हाथ की-बोर्ड पर चल रहे है.
" मुझे गूगल चाहिए बस!..मै और कुछ नहीं लूंगा हां! मुन्ना कंप्यूटर को सहलाता हुआ बोला.
" ठीक है, ठीक है,...तुम्हें भी गूगल मिल जाएगा!. अब बाहर जा कर खेलो...देख नहीं रहे, मै गूगल पर काम कर रहा हूं!" पापा ने भी कंप्यूटर को गूगल बताते हुए जवाब दे दिया.
 
 जब गूगल लांच हुआ था तो लोगों क ध्यान इसकी तरफ ज्यादा गया ही नहीं था. एक सादासा पेज था. इस पर विञापनों के लिए कोई जगह नहीं थी. 1998 का समय, पहले डॉटकॉम बुम का समय था.याहू जैसे तमाम वेबसाइट पर विञापनों की भरमार थी. लेकिन ऐसे में गूगल की सादगी ने भी कुछ लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया.
 
गूगल ने समय रहते अपना सारा ध्यान सर्च तकनीक पर दिया और दूसरी वेबसाइटे इसकी चमक के आगे फिकी लगने लगी. गूगल की खासियत यह रही की इसने साइबर संसार की हर आहट को समय रहते ही पहचान लिया. ब्लॉगिंग अभी शुरु हुई ही थी कि इसने ब्लॉगर को खरीद लिया. गूगल की नज़र हंमेशा अपना नेटवर्क बढाने की संभावनाओं पर रही. शायद उसमें यह आत्मविश्वास था कि वह किसी भी साइटसे मुनाफे का जुगाड़ आखिर में खोज ही लेगा.सिर्फ डबल क्लिक की ख़रीद ही इसका अपवाद है.
 
गूगल ने सोशल नेटवर्किंग,ऑनलाइन बुक्स और एक एक गली का सेटेलाइट नक्शा देने तक की कई चीजें शुरु कर दी है. गूगल का ऑफिस संस्करण ऑनलाइन उपलब्ध है और उसे ऑफलाइन देने की तैयारी भी ज़ोरों पर है.
 
अब आप ही बताइए कि गूगल की 'जय' आप भी हमारे साथ बोलेंगे कि नहीं?
 
 
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टिप्पणियाँ

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  1. padhhkar maza aayega...

    ambalika

    11 फरवरी 2008

    Google ke baaremein itana mazedaar lekh aapane pehale kabhI nahin padhha hoga!

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