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Pinjade Ke Panchhi Re..Tera Dard Na Jaane Koi!

Summary rating: 4 stars 3 समीक्षा
लेखक : Hindustan, ambalika
Summary by : ambalika
विजिट्स: 57
शब्द: 600
प्रकाशन तिथि: फरवरी 08, 2008
व्यथा                      पिंज़डे के पंछी रे...तेरा दर्द न जाने कोई!
 
 
एक आज़ाद पंछी को कैद में-पिंज़डे मे-बंद कर के रखा जाए तो उसकी जो हालत होती है?...यही हालत बांगला देश की ख्यातिप्राप्त लेखिका की हुई है. लेखिका का नाम है, तसलीमा नसरीन!
 
यह लेखिका अपने लेखन के वजह से ही बांगला देश से बाहर निकाली गई. भारत में शरण लेने के बावजूद भी इसकी समस्याओं का अंत हुआ नहीं है. शुरुआती दौर में ये लेखिका कोलकाता के पॉश इलाके में रहने के लिए आ गई थी. सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा था. लिखनेका काम भी लेखिकाने सुचारु ढंग से ज़ारी रखा हुआ था. लेखिका ने एक ऐसी कहानी पर किताब लिख डाली कि मुस्लीम धर्म गुरुओं के नज़र में वह गुनहगार बन गई. उससे माफी मांगकर उस किताब से आपत्तिजनक प्रकरण हटाने के लिए भी कहा गया....लेकिन अफसोस! इस लेखिका ने मना कर दिया और चिनगारी भड़क उठी.
 
...मुस्लीम समाज़ के विरोध को देखते हुए इस लेखिका की जान पर मंडरा रहा ख़तरा साफ तौर पर दिखाई देने लगा. ऐसे में भारत सरकार का फर्ज था कि शरणागत की रक्षा करें इसी कार्यक्रम के चलतें तसलीमा नसरीन को कोलकाता से पहले जयपुर ले जाया गया. हालाकि यह भी एक मीडिया वालों की अटकल ही है कि उसे जयपुर ले जाया गया!... कुछ दिन उस बेनाम स्थान पर रखने के बाद, तसलीमा को दिल्ली लाया गया. दिल्ली में इसकी सुरक्षा के पूरे इंतज़ाम है. अब लगभग तीन महीनों से ये दिल्ली के ही किसी अञात स्थान पर रह रही है.
 
...बीच बीच में खबरें आ रही है कि ये वापस कोलकाता जाना चाहती है पर इसकी सुरक्षा को लेकर इसे वहां नहीं भेजा जा रहा और अब बेहद परेशान है.....किसी संवाददाता को ई- मेल से प्राप्त इन कविताओं में तसलीमा के दिल की हालत का पता चल रहा है.
 
....अपनी व्यथा को व्यक्त करतें हुए तसलीमा ने इस समय बांगला में सोलह कविताएं लिखी है. हर कविता के अंत में सेफ हा उस, दिल्ली भी लिखा है. ''''जे घरडीते आमाके बाध्य करा होच्छे'''' ( जिस घरमें रहने को मुझे बाध्य किया जा रहा है...) शिर्षक वाली कविता में तसलीमा में अपना असह्य दर्द व्यक्त किया है.लिखा है कि इस घर में प्रवेशाधिकार किसी को भी नहीं है.दूसरी एक कविता में सांस लेने भी कैसी तकलीफ होती है,घुटन होती है...इसका वर्णन है.
 
अंत में लिखा है कि मेरा क्या कोई देश नहीं है? मै अपराधी हूं? मानवता की दुष्मन हूं?.... ''''नोमैंसलैंड'''' नामक कविता में तो यह चीख कर पूछ रही है कि '''' अपना देश ही अगर तुम्हे न दे देश,तो दुनिया का कौनसा देश है जो तुम्हे देगा देश?....बोलो!
 
 
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