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Gajala Ameen...Jisane Banaai Khaas Pehachaan!

Summary rating: 4 stars 3 समीक्षा
लेखक : Hindustan, ambalika
Summary by : ambalika
विजिट्स: 50
शब्द: 600
प्रकाशन तिथि: फरवरी 06, 2008
महिला जगत          गजाला अमीन...जिसने बनाई खास पहचान!
 
 
एक खुश-खबर खास तौर पर महिलाओं के लिए भी है...हाल ही में अमेरिका के सेंटर फॉर सिटिजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज ने 9 व्यक्तियों को फ्यूचर लीडर के तौर पर चुना है और उन्ही में से एक है गजाला अमीन!
 
गजाला अमीन का नाम वैसे तो प्रसिद्ध है ही यह लंबे समय से टी.वी. और फिल्मों से जुडी हुई पर्सनालिटी है.अब कुछ इनकी भी सुने कि यह क्या कहती है....
 
"मिडीया में मेरी हंमेशा से ही रुचि रही है.बचपन ही से नाटकों और स्टेज का आकर्षण रहा है. कॉलेज की पढाई के दरमियान नाटको में हिस्सा लेती रहती थी. ऐसे ही कार्यक्रम के दौरान एक प्रोड्यूसर ने मुझे एनाउंसर बनने की सलाह दी. मैने भी पूरी मेहनत की और एक-एक सिढ़िया चढ़ते हुए किसी मुकाम पर पहुंच गई.
 
मैने सर्व प्रथम लंदन को अपना क्षेत्र चुना. वहां न्यूज रीडर के रुप में अपनी पहचान बनाई. मैने इसके लिए हिन्दी भाषा का ही चुनाव किया; क्यों कि इसकी पहुंच पूरे हिन्दुस्तान में है. न्यूज एंकर के अलावा मैने सोनी और जी.टी.वी.के लिए वॉयस ओवर का काम भी किया. इसी दरमियान एक धारावाहिक ''''तितली'''' में भी काम किया.यह सबा जैदी द्वारा निर्देशित था. इसके उपरांत विदेश मंत्रालय के लिए सेंट्रल एशिया पर तीन फिल्मों का निर्माण भी एक अनोखा अनुभव रहा.
 
''''इनाडू'''' उर्दू चैनल के लिए ''''बज्म-ए-ख्वातीन'''' प्रोग्राम किया, जो महिलाओं के लिए था. महिलाओं के सशक्तिकरण पर आधारित इस प्रोग्रामसे मुझे बहुत संतोष मिला. यह प्रोग्राम 26 देशों में दिखाया जाता था और बेहद लोकप्रिय था. मैने स्टारन्यूज पर भी काम किया. यहां एक साल तक इस चैनल के एंकर और रिपोर्टरों को ट्रेनिंग दी. प्रशिक्षण का यही काम मैने इंडिया टी.वी. और सहारा टी.वी. के लिए भी किया. सभी तरह के काम करने के बावजूद भी मेरा मन वापस एक्टिंग मे जाने के लिए कर रहा था. मुझे अनुराग कश्यप की फिल्म ''''आमिर'''' में यह मौका मिल गया.''''आमिर'''' में मैने ''''कैमियो'''' किया है. सईद मिर्जा कि फिल्म ''''सावधान मेरी जान'''' में भी काम कर रही हूं.
 
मुझे पसंद नहीं है कि औरतों की नकारात्मक छबी प्रस्तुत की जाए! आजकल ऐसे ही धारावाहिक चैनलों पर आ रहे है.पहले के धारावाहिकों में मनोरंजन के साथ-साथ संदेश भी होता था...पर अब ऐसा नहीं है. आजकल क्राइम और अंधविश्वासों पर आधारित धारावाहिक ज्यादा दिखाए जा रहे है.
 
आज की युवा पिढी के सामने इस क्षेत्र में चुनौती और अवसर दोनों ही समान रुप से है. उन्हें क्रिएटिव और इनोवेटिव होने की ज़रुरत है. नकल से भी बचना है. <
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