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Hindu Dharm Ek...Devi-Devata Anek!

Summary rating: 5 stars 2 समीक्षा
लेखक : ambalika
Summary by : ambalika
विजिट्स: 65
शब्द: 600
प्रकाशन तिथि: जनवरी 26, 2008
सामाजिक                   हिन्दु धर्म एक...देवी-देवता अनेक!
 
 
यह लेख मै एक हिन्दु होने के नाते या हिन्दु धर्म के प्रचार को ध्यान में रख कर नहीं लिख रही...इस बात का खुलासा पहले ही कर रही हूं. सिर्फ एक सामाजिक जानकारी जो मुझे उपलब्ध है; उसी को ध्यान में रख कर मै यह लेख लिख रही हूं.
 
हिन्दु धर्म में अनेक देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है,यह सर्व विदित है. इस बात को ले कर भी मुद्दा उठाया जाता है कि अगर हिन्दु ईश्वर एक होने की बात भी कहतें है और ईश्वर को राम, कृष्ण, शिव,दुर्गा, अंबा, गणेश, सरस्वती...इत्यादी के रूपमें भी पूजते है.आखिर ऐसा क्यों है?
 
यहां, इस विषय पर जानकारी प्राप्त करने के परिणाम स्वरुप मै इस नतीज़े पर पहुंची हूं कि हिन्दु, ईश्वर या परमेश्वर को एक ही मानते है. संकट की धड़ी मे ''हे भगवान! हे प्रभू!'' ''हे ईश्वर!'', या ''हे परमपिता!'' का ही उच्चारण करतें है. जैसे की क्रिश्चियन ''ओ ग़ॉड!''और मुस्लिम ''या अल्ला!'' कहकर उस सर्वशक्तिमान को याद करतें है.
 
..अब अलग़ अलग़ देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करने की शुरुआत हिन्दु धर्म में कुछ इस उद्देश्य से हुई है. जैसे कि किसी खास चीज को प्राप्त करने के लिए, हम कुछ खास प्रयास तो अवश्य ही करतें है.हमें भूख लगती है तो हम खाद्य-पदार्थो की कामना करते हुए, उन्हें पाने की कोशिश में जुट जातें है. जब तन के लिए कपड़ों की जरुरत महसूस होती है तो उस दिशामें प्रयत्नशील हो जाते है. यह मनुष्य का स्वभाव ही है कि ज़रुरत के अनुसार ही कार्यशील बना रहे.
 
..अब जब ञान प्राप्ति की या कुछ नया सिखने के लिए बुद्धि की ज़रुरत पड़ती है तो ईश्वर को ''देवी सरस्वती'' कह कर संबोधित करना और एक विशिष्ट रुप में आंखों के सामने लाना हिन्दु धर्म में बताया गया है.यह प्रक्रिया एक सुविधा के लिए ही है. यह मन की एकाग्रता ञान प्राप्ति की दिशा में बढाने के उद्देश्य से हिन्दु धर्म द्वारा दिया गया उपदेश है.
 
...वैसे ही व्यावहारिक बुद्धिमत्ता को क्रियान्वित करने के लिए ईश्वर को ''गणेश'' नाम से पूजा जाता है.गणेश की प्रतिमा भी एक विशिष्ट रुप में आंखों के सामने लाई जाती है. इस प्रकार व्यावहारिक बुद्धिमत्ता पर मन की एकाग्रता कैसे की जाए...यह दर्शाया गया है.
 
...इसी प्रकार से अगर आप के पास बुद्धिमता और दूसरी चीज-वस्तुएं होने के बावजूद धन नहीं है....तो ईश्वर को ''देवी लक्ष्मी'' के विसिष्ट रुप में याद कर के पूजन करने के लिए उपदेश दिया गया है. विविध कार्यों के लिए विविध रुपों मे ईश्वर को याद करना और उसकी पूजा-अर्चना करना हिन्दु धर्म की व्यवस्था का ही एक पहलू है.
 
, हिन्दु धर्म में यह व्यवस्था की गई है...ऐसा मेरा मानना है. ईश्वर को अलग़ अलग़ विषयों के लिए अलग़ अलग़ रुपों मे रखने की प्रक्रिया...ईश्वर को अलग़ अलग़ फाइलों में व्यवस्थित ढंग से संजो कर रखनेकी एक अच्छी पद्धति हिन्दु धर्म ने अपनाई हुई है. इसी के परिणाम स्वरुप अनेक देवी-देवता हिन्दु धर्म की पहचान है.
 
 
 
Hindu Dharm Ek...Devi-Devata Anek!  द्वारा  ambalika    2008 
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