Hindustan
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प्रकाशन तिथि: जनवरी 12, 2008
एवरेस्ट पर फतह पाने वाले...सर एडमंड हिलेरी नही रहे!
हिमालय की सबसे ऊंची चोटी, जो माउंट एवरेस्ट है; यह किसी ज़माने में इन्सान की पहुंच से बहुत दूरी पर थी. यहां पहुंचने की कोशिश करने वालों की कमी नही थी....लेकिन किसीको सफलता मिलती नहीं थी. एक निश्चित उंचाई पर पहुंचने के बाद एवरेस्ट की तरफ कूच करने वाले दल वापस लौट आते थे या रास्ते में ही अत्यधिक ठंड और बर्फिले तूफानों में फंसकर अपनी जान गंवा बैठते थे.
20 जुलाई 1919 को आकलैंड में जन्मे एडमंड हिलेरी नाम सुवर् अक्षरों में लिखा गया; जब वे एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने में कामयाब हो गए.पहले तो उन्हों ने हिमालय की 20 हजार फीट से ऊंची 11 चोटीयां नाप डाली.
1953 में जब उनका दल दक्षिणी चोटी पर पहुंच गया तो दल के दो सदस्यों को छोड कर बाकी सदस्य विवश हो कर वापस लौट आए.दो सदस्य जो आगे बढते ही चले गए वे एडमंड हिलेरी और शेरपा तेनजिंग नोरवे थे. आखिर कार 29 मई 1953 के दिन इन दोनों ने 29,028 फीट ऊंची माउंट एवरेस्ट की चोटी पर फतह पा ली.
सर एडमंड हिलेरी के निधन पर भारत समेत दुनिया के तमाम देशों ने शोक संदेश जताया है.