Mandir, Ishwar-Bhakti aur Manoranjan...sab ek saath!
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प्रकाशन तिथि: जनवरी 02, 2008
मंदिर, ईश्वर-भक्ति और मनोरंजन...सब एक साथ!
मंदिर का नाम लेते ही राम, कृष्ण या शिवजी की भव्य प्रतिमा आंखों के सामने आने के दिन लद गए है. पुराने भजन किर्तन अभी भी चल रहे है, अभी लुप्त नहीं हुए है; पर नए, याने कि सिनेमाई सूरताल के साथ सुनाई दे रहे है. कहनेका तात्पर्य यही कि यहां भी मनोरंजन परोसनेकी भरपूर चेष्टा की जा रही है.
भारत के जानेमाने सोमनाथ मंदिर कोम्पलेक्स को ही देखिए. यहां वैदिक लाइब्रेरी,शानदार शिल्प, संस्कृत विश्वविद्यालय, फव्वारे और सर्व सुविधाओं से परिपूर्ण हॉटलों का निर्माण भी हो रहा है. ट्रस्ट के सेक्रेटरी अशोक शर्मा कहते है कि आने वाले दस सालों में इस जगह का ऐसा काया-पालट हो जाएगा कि इसके साथ पहलेवाली पहचान को आप किसी तरह से भी जोड़ कर नहीं देख सकतें!
...दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर का भी उदाहरण दिया जा सकता है. यमुना किनारे 30 एकड़ में बने इस मंदिर का सालाना चढावा 18 करोड़ रुपये है. इसे हाल ही में सबसे विशाल हिंदू मंदिर के तौर पर गिनीज बुक में जगह मिली है. यह दिल्ली का एक पिकनिक स्पॉट भी बना हुआ है; इसे देखने दुनियाभर के पर्यटक आते है.
...देश का सबसे संपन्न माना जानेवाला मंदिर तिरुपती बालाजी का ट्रस्ट 20 स्कूल-कॉलेज, कई अस्पताल और कई हॉटल पहले से ही चला रहा है.
इन सबके पीछे धन का बल तो है ही; साथ ही भगवान के प्रति आस्था का भी यह चमत्कार है. भगवान में आस्था हो, सभी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हो और साथ में मनोरंजन भी हो तो… मंदिर कौन नहीं जाना चाहेगा?