Kyaa Atirikta Surakshaa Bachaa Sakati thi Benazir Bhutto ko?
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प्रकाशन तिथि: दिसम्बर 29, 2007
क्या अतिरिक्त सुरक्षा बचा सकती थी बेनजीर भुट्टो को?
कौन जानता था कि एक धधकता ज्वालामुखी.. अचानक यूं ही गर्त में समा जाएगा?... हां! अंत बेनजीर को, खुद को सामने नज़र आ रहा था और वह इसीलिए और अतिरिक्त, और मजबूत, सुरक्षा की मांग कर रही थी. ...लेकिन क्या और मजबूत सुरक्षा उसे बचा सकती थी?...
..इसका जवाब तो किसी के पास भी नहीं है. भारत और पाकिस्तान ही क्या...दुनिया के अन्य देशों में भी इस तरह की ह्त्याएं हुई है. भारत में श्रीमति इंदिरा गांधी की ह्त्या हुई, राजीव गांधी की हत्या हुई... यहां पर भी कहा गया कि सुरक्षा में कोताही बरती गई थी.अमेरिका में प्रैसिडेंट जॉन एफ्.केनेडी की गोली लग कर हत्या हो गई थी, तब भी उनकी सुरक्षा के इंतज़ाम पर प्रश्नचिन्ह लगाया गया था.
..जब बड़ी हस्तियां बम धमाके या गोलीबारी की शिकार हो कर जान से हाथ धो बैठती है, तब सबसे पहले यही सोचा जाता है कि उनकी सुरक्षा में कोताही बरती गई थी. जब आम इंन्सान बम धमाकों के या गोलीबारी के शिकार हो जाते है... तब किसी भी देश का प्रशासन उसकी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जाता?
..जब किसी हादसे को जानबूझ अंजाम दिया जाता है...या अनजाने में कोई हादसा होता है तो जाहिर है कि नुकसान तो बड़ा ही होता है. ऐसा न हो, इसके लिए पहले ही से पुख़्ता इंतजाम हो यह इच्छ्नीय़ है. ...आम और खास इंसान में फरक करते हुए सुरक्षा के इंतज़ाम में कमियां निकालना निंदनीय है.
पाकिस्तानकी पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टों का ऐसा दुःखद अंत कई सवाल ख़ड़े करता है... पर अब उन्हें तो बस हम अपनी दिली श्रद्धांजली ही दे सकते है और उनकी पाक आत्मा की शांति के लिए ईश्वर और अल्लाह से नेक प्रार्थना ही कर सकतें है!