Matheran..ek prakritik saundarya kaa khajaanaa!
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प्रकाशन तिथि: दिसम्बर 18, 2007
पर्यटन माथेरान...एक प्राकृतिक सौंदर्य का खज़ाना!
प्राक़ृतिक सौंदर्य का अनुपान करना चाहते है आप? आपाधापी से दूर रहकर कुदरत की गोद में पनाह लेना चाहते है आप?.... तो माथेरान क्यों नहीं चले जाते?
यहां बर्फ से ढ़की पहाडियां नहीं है...यहां तो घना जंगल है. माथेरान का मतलब ही ''शिखर पर घना जंगल'' है.माथेरान की खोज़ 1850 में ठाणे के जिला कलेक्टर ह्यूज मॉलेट ने की थी. ठंड से ठीठुरना अगर आप नहीं चाहतें...फिर भी ठंड का मज़ा लेना चाहते है तो माथेरान का चुनाव ही आपके लिए सर्वोत्तम है.
मोटर्-गाडियों से उत्पन्न प्रदूषण का यहां नामों निशान नहीं है. यह मुंबई और पूणे के बीच का पहाड़ी इलाका है. माथेरान से तीन किलोमीटर पहले ही कारें रोक दी जाती है. आगे का पहाड़ी रास्ता घोड़े-खच्च्रर्, रिक्शा, पालकी या नेरल से आ रही ट्वाय ट्रेन द्वारा तय करना होता है. टॉय-ट्रेन को ''माथेरान लाइट रेल'' भी कहते है.
जहां कारें रोक दी जाती है... इस जगह पर अमन लॉज की भव्य इमारत खड़ी है.. यहां से माथेरान की रेलयात्रा सिर्फ सात मिनट की है. यह रेल गाड़ी मुंबई से पूणे रेलमार्ग पर 87 किलोमीटर दूर स्थित नेरल से माथेरान के लिए चलती है. नेरल से माथेरान की उंचाई 800 मीटर है और दूरी 21 किलोमीटर है. ट्रेन की गति 12 किलोमीटर प्रति घंटा है. अब आप ट्रेन में बैठे बैठे भी प्राकृतिक सौंदर्य का मज़ा ले सकतें है. धीमी गति से चलने वाली यह ट्रेन रोज़ाना के तनाव से मुक़्ति दिलवाने का काम भी करती है.... आजमाकर तो देखिए! आप यकीनन मुझसे कई गुना ज्यादा तारीफ़ ट्रेन की और माथेरान की भी करेंगे!
इसी वर्ष माथेरान-नेरल लाइट रेल्वे शताब्दी भी मना रही है. खुश ख़बर यह भी है कि यह रेल्वे लाइन यूनेस्को की विश्व विरासत स्थलों में शामिल होने जा रही है...तो देर न करें और जल्दी ही माथेरान की सैर का प्रोग्राम बना डालें!