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Retailing Kaa Kaarobaar fail rahaa hai!

Summary rating: 5 stars 1 समीक्षा
लेखक : Hindustan, ambalika
Summary by : ambalika
विजिट्स: 95
शब्द: 300
प्रकाशन तिथि: दिसम्बर 18, 2007
                          रिटेलिंग का कारोबार फैल रहा है!
 
 
विशेषञों का कहना है कि वर्ष 2010 तक देश का संगठित रिटेल क्षेत्र 22 अरब डॉलर को पार कर जाएगा. विश्व में खुदरा निवेश के सबसे बड़े केन्द्र के रुप में भारत का नाम सामने आ रहा है. संगठित रिटेल व्यापार का फैलाव बड़े नगरों के अलावा दूसरे और तीसरे श्रेणी के शहरों में भी बढता जा रहा है. मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता जैसे महानगरों में रिटेल मार्केट्स की भरमार है तो... कानपूर, लुधियाना, वडोदरा और इंदौर जैसे छोटे समझे जाने वाले शहर भी अब रिटेल मार्केट से अछूते नहीं है.
 
 
कहा जा रहा है कि रिटेल क्षेत्र की भागीदारी घरेलू अनुपात (जीडीपी)में और भी बढ़ेगी.खाने-पिने की चीजें भारत में सबसे ज्यादा बिकती है.इस बात को भी रिटेल क्षेत्र ध्यान में रखे हुए है. इसी वजह से फूड इंडस्ट्री मार्केट 6.1 अरब डॉलर का है जबकि संगठित खुदरा बाज़ार भारत में मात्र 3.5 प्रतिशत आंका जा रहा है. ...फिर भी इसके भी विकास की संभावनाऑ का कयास लगाया जा रहा है.
 
 
भारत में विश्व की एक बड़ी रिटेल कंपनी वाल मार्ट ने भारती समूह के साथ मिल कर कदम रखनेका ऐलान भी कर दिया है.वैसे ही टाटा समूहने ऑस्ट्रेलिया की रिटेल कंपनी वूल वर्थ के साथ रिटेल बाज़ार में आने की घोषणा की है.रिलायंस भी रिटेल मार्केट में आ चुकी है.इनकी योजना छोटे-बड़े 1500 शहरों में अपना स्टोर खोलने की है और इस्की लागत लगभग 25,000 करोड़ की बताई जा रही है.
 
 
... जाहिर है की कंपनीयों की आपसी प्रतियोगिता बढती जाएगी तो पब्लिक को सामान भी क्वालिटी का ही मिलेगा और दाम के हिसाब से खरीदारी करते समय विकल्प भी नज़रों के सामने ही होंगे!
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