Gavwalon ke swastya ke saatha khilwad...
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प्रकाशन तिथि: दिसम्बर 06, 2007
गांववालों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़...
डॉक्टर कहते है...हम गांव नहीं जाएंगे !
...भारत में डॉक्टरों ने यह घोषणा कि है कि वे गांव मे नहीं जाएंगे!... तो फिर गांव के अस्पतालों का हाल होगा? बिमारों का क्या हाल होगा? क्या वहां की पब्लिक भी गांव छोड कर शहरों की और रुख करेगी?... या गांव में रहनेवाले निम-हकीमों से इलाज़ करवाती रहेगी? ढोंगी साधु और टोने-टोट्के करने वाले अपराधी प्रवृत्ति के लोग,गांववालों को पहले ही से लूट रहे है और उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है....समस्या वाकई गंभीर है.
...पता चला है एम.बी.बी.एस.कोर्स की अवधी एक साल बढ़ा दी गई है और् डॉक्टरों के लिए एक वर्ष तक ग्रामीण इलाकों मे जाकर मरीज़ों का इलाज़ करने के लिए अनिवार्यता घोषित की गई है. इस फरमान का विरोध करते हुए भारतीय आयुर्विञान संस्थान(एम्स)के डॉक्टर एक जुट हो गए है.
..अब डॉक्टर्स का यह कहना तो जायज है कि कोर्स की अवधी,एक वर्ष बढा देना ठीक नहीं है...पर उनका ग्रामीण इलाके में जाने से मना कर देना बिलकुल ही ग़लत है.यह पब्लिक के स्वास्थ्य के साथ् खिलवाड़ करने वाली सच्चाई है.
...डॉक्टर, गांव मे अतिरिक्त सुविधाओ की मांग करतें,तो जायज था.डॉक़्टरों को अपने पेशे के सन्मान का खयाल रखते हुए अपनी ''गांव न जाने की घोषणा'' तत्काल वापस लेनी चाहिए.