दहेज का झूठा बवंडर...
शादी जब टूटने की कगार पर होती है तब पति पत्नी पर...और पत्नी पति पर कई तरह के
आक्षेप लगाने शुरु कर देती है.कुछ आक्षेप सच्चे तो कुछ इतने झूठे होते है कि सभ्यताकी सभी हदें पार कर रहे होते है.
यह तो सभी जानते है कि दहेज लेने और देने पर...कानून ने सख्ती से पाबंदी लगाई है.दहेज लेना एवं देना,दोनों ही
अपराध है.अब जैसे कि उपर बताया गया कि पति-पत्नी में अलगाव पैदा होता है और दोनों एक दूसरे के साथ रहना नहीं चाहते... तब तलाक-डिवोर्स्-लेने की नौबत आ जाती है. ऐसेमें पत्नी सबसे पहले पति पर दहेज मांगने का आक्षेप लगाती है.इसके लिए प्रमाण भी पेश किए जाते है.कई बार पति दहेज लेने के लिए दोषी भी ठहराए जाते है.
अगर ऐसा है तो दहेज देने वाले को दोषी क्यों नहीं ठहराया जाता? क्या उसे पता नहीं है कि दहेज देना भी अपराध है? पता अगर है...तो उसने क्या सोच कर दहेज दिया था? ..यह मुद्दा अगर सख्तीसे उठाया जाए, तो पता चल ही जाएगा कि पत्नी द्वारा, दहेज लेने का पति पर लगाया गया आरोप किस हद तक सच्चा है!
...इस तरह से दहेज को ले कर खड़ा किया गया बवंडर, वाकई में निंदनीय है.