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ek lekhikaa ki aisi durdashaa!

Summary rating: 3 stars 3 समीक्षा
लेखक : ambalika
Summary by : ambalika
विजिट्स: 188
शब्द: 300
प्रकाशन तिथि: नवम्बर 23, 2007
                  एक लेखिका की ऐसी दुर्दशा!
 
 
मै तसलिमा नसरीन की बात कर रही हूं! यह लेखिका अपने वतन बांगला देश से निष्कासित है.इसकी एक किताब का मुस्लिम समाज द्वारा जबरद्स्त विरोध किया गया था.मैने यह किताब पढी नहीं है...पर एक लेखिका और स्त्री होने के नाते भी लगता है कि इसके साथ ज्यादती हुई है.अगर  कुछ ऐसी आपत्ती जनक स्टेटमेंट थी; तो इस लेखिका की उस किताब पर प्रतिबंध लगाया जा सकता था.लेखिका के उपर जुर्माना भी लगाया जा सकता था....पर इसे तो देश निकाला दिया गया.
 
अब यह भारत में शरण लिए हुए है. कुछ वर्षों से कोलकाता में रहनेके बाद अब फिर इस लेखिका को विपत्ती का सामना करना पड़ रहा है.कहा जाता है कि जमायत उलेमा हिंद पार्टी द्वारा इसका पुतला जलाया गया.कोलकाता में हिंसा भड़क उठी, इसकी सुरक्षा खतरेमें पड़ गई और इसे अब कोलकता छोड़ कर जयपुर में शरण लेनी पड़ गई है.
 
ek lekhikaa ki aisi durdashaa!  द्वारा  ambalika    2007 
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टिप्पणियाँ

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  1. strion ka sanmaan kyon nahi?

    ambalika

    23 नवम्बर 2007

    ek stri hone ke naate is lekhikaa ke saath itni jyaadati nahi honi chaahiye!

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