बच्चों के खिलौनों पर कितना ध्यान देते है आप?
सुंदर..अति सुंदर रंग-बिरंगे खिलौने! ऐसे मन मोहक कि नज़र हटने का नाम ही
नहीं ले रही....यह दुकान गली कूचे में है तो क्या हुआ..यहां खिलौने भी सस्ते ही मिलते है.
" हां जी! यह डॉल पैक कर दीजिए..."
आप को डॉल पसंद आ गई;अब बेटे को मुन्नि के लिए टेडी-बियर पसंद है.
" हां जी! इसे भी पैक कर दीजिए... ये रही आपकी पेमेंट.." कहते हुए आप ने बिल भी पे कर दिया और खुशी खुशी घर आ गए.
... तीन दिन बाद्...बडे बेटे की
स्किन पर दाने उभर आए है और टेडी-बियर के साथ खेलने वाली छोटी
मुन्नी को तेज बुखार-फिवर-है और उल्टियां भी आ रही है.दोनों को डॉक्टर के पास ले जाया जाता है.डॉक्टर कहते है कि....
"किसी पॉयज़नस कैमिकल का इफेक्ट है. इसीकी की वजह से बेटे की स्किन पर दाने उभर आए है... ठीक होने में समय लगेगा. आप जल्दी दिखाने आ गए,नहीं तो भयंकर दुष्परिणाम भी हो सकता था.मुन्नी के खाने में भी कोई पॉयज़नस चीज ही आई है... दवाई लिखकर दे देता हूं!" ...और डॉक्टर मोटी फीस ले कर दवाइयां लिखकर दे देते है.
क्या समझ गए आप? डॉल को जिन रंगों ने आकर्षक बनाया था...उसीके के सतत संपर्क में आने की वजह से बेटे की स्किन पर दाने उभर आए और टेडी-बियर को मुंह में डालने की वजहसे मुन्नी कि फीवर और उल्टियों से परेशान होना पडा.
जब भी बच्चों के लिए खिलौने खरीदें....अच्छी दुकान और खिलौनों की मान्यताप्राप्त कंपनी का लेबल देख कर ही खरीदें. बच्चों की जान जोखिम में मत डालें.