सर्च
×

साइन अप

Use your Facebook account for quick registration

OR

Create a Shvoong account from scratch

Already a Member? साइन इन!
×

साइन इन

Sign in using your Facebook account

OR

Not a Member? साइन अप!
×

साइन अप

Use your Facebook account for quick registration

OR

साइन इन

Sign in using your Facebook account

श्वूंग होम>Products>Consumer Electronics >सही देखभाल से सालों-साल चले इनवर्टर

सही देखभाल से सालों-साल चले इनवर्टर

द्वारा: pratima avasthi     लेखक : अमित गोयल
ª
 
सही देखभाल से सालों-साल चले इनवर्टर 

 बिजली की किल्लत का कोई भरोसा नहीं। वैसे भी अब इनवर्टर केवल सीजनल नहीं रह गए हैं, बल्कि उनकी जरूरत पूरे साल पड़ती है, तभी तो देश में इनवर्टर का बाजार हर साल 20-40 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। गर्मियां आते ही एनसीआर में बिजली की परेशानी भी बढ़ रही है। खासतौर पर गाजियाबाद का तो बुरा हाल हो रहा है। ऐसे में लोगों को पावर इनवर्टर काफी राहत देता है। आज के समय में यह काफी जरूरत का सामान साबित हो चुका है। कुछ साल पहले तक इनवर्टर एक लग्जरी आइटम माना जाता था, लेकिन आज यह लोगों की जरूरत बन गया है। अच्छी देखभाल से इसकी लाइफ बढ़ाई जा सकती है।

पावर इनवर्टर का काम डायरेक्ट करेंट (डीसी) को अल्टरनेट करेंट (एसी) में बदलना होता है। ज्यादातर इनवर्टर 12 वोल्ट डीसी पावर को 120 वोल्ट एसी पावर में बदलते हैं। बिजली कटौती की स्थिति में पावर इनवर्टर की सहायता से आप अपने घर में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कार की बैटरी या किसी अन्य डीसी सोर्स की सहायता से भी चला सक ते हैं। बिजली पर खर्च को कम करने के लिए इस समय सोलर पावर इनवर्टर भी माकेर्ट में उपलब्ध हैं। ये बिजली की बजाय सूरज की किरणों से चार्ज होते हैं। सूरज की रोशनी डायरेक्ट करेंट (डीसी) पैदा करती है, उसे एसी में बदलने के लिए पावर इनवर्टर की जरूरत पड़ती है। इस तरह के पावर इनवर्टर को ग्रिड-टाई या ग्रिड इनवर्जन कहते हैं।

इस समय बाजार में तीन हजार से 30 हजार रुपये तक के इनवर्टर मौजूद हैं। वैसे, लोगों का झुकाव डिजिटल इनवर्टर की तरफ ज्यादा है। वे नामी ब्रैंड तो खोजते ही हैं, साथ ही किफायती मॉडल भी चाहते हैं। यानी ऐसे मॉडल, जो पावर का लंबा बैकअप दे सकें। आजकल डिजिटल इनवर्टर का दौर है। एक सवेर् के मुताबिक, लगभग 900 करोड़ रुपये के इनवर्टर बाजार में डिजिटल इनवर्टर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। इन इनवर्टरों की खासियत यह है कि ये आपको ओवरलोड से सुरक्षा प्रदान करते हैं और बैट्री को भी ओवरचार्ज नहीं होने देते।

नोएडा के अट्टा माकेर्ट में इलेक्ट्रॉनिक्स कीशॉप चलाने वाले अमित गोयल बताते हैं, 'पावर इनवर्टर का उपयोग एक छोटे-से कंप्यूूटर से लेकर बड़ी इंडस्ट्रियल यूनिट तक को बिजली सप्लाई करने में किया जा सकता है। घरेलू उपयोग के लिए दो तरह के इनवर्टर माकेर्ट में मौजूद हैं। ये हैं प्योर साइन वेव और मॉडीफाइड साइन वेव। प्योर साइन वेव इनवर्टर, मॉडीफाइड साइन वेव इनवर्टर के मुकाबले महंगा होता है। लैपटॉप, लेजर प्रिंटर या मेडिकल साइंस में प्रयोग किए जाने वाले उपकरणों या अन्य हाई एंड टेक्नॉलजी के उपकरणों के लिए प्योर साइन वेव इनवर्टर का प्रयोग किया जाता है। टीवी, पंखे, कूलर जैसे सामान्य घरेलू उपकरणों के लिए मोडीफाइड साइन वेव का प्रयोग किया जाता है। माकेर्ट में लोकल लेवल पर बनाए गए इनवर्टर भी उपलब्ध हैं, जो दाम में तो सस्ते होते हैं, लेकिन इनकी क्वॉलिटी के बारे में कोई गारंटी नहीं दी जा सकती।

प्रयोग में सावधानी
किसी भी होम एप्लायंज की तरह आपको इनवर्टर खरीदने से पहले भी उसकी पूरी जांच-पड़ताल कर लेनी चाहिए और उसके बारे में तमाम जरूरी बातें जान लेनी चाहिए। इनवर्टर खरीदते समय उसकी मशीन और बैट्री की कैपेसिटी पर खास ध्यान देना जरूरी है। मशीन की कार्यप्रणाली की भी जानकारी ले लेनी चाहिए। कुछ इनवर्टर लाइट देने में समय लगाते हैं और आवाज भी काफी करते हैं, जबकि कुछ की टेक्नॉलजी ऐसी होती है कि बिजली जाते ही लाइट ऑन हो जाती है और आवाज भी नहीं होती। बाजार में हर तरह के विकल्प मौजूद हैं। आप अपनी जरूरत और बजट के मुताबिक कोई भी अच्छा मॉडल चुन सकते हैं। इनवर्टर खरीदने से लेकर इसके प्रयोग तक में काफी सावधानी की जरूरत होती है। इनवर्टर के प्रयोग में लापरवाही दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। नोएडा स्थित सेक्टर 10 के पावर इनवर्टर मेंटिनेंस एक्सपर्ट संदीप अग्रवाल इनवर्टर को प्रयोग करते वक्त इन सेफ्टी टिप्स की सलाह देते हैं :

- इनवर्टर और केबल को ज्वलनशील पदार्थों से दूर रखें। गैस, तेल या किसी और ज्वलनशील पदार्थ के इनवर्टर के पास रहने पर इनवर्टर में स्पार्किंग की स्थिति हो सकती है, जिससे आग लगने का डर रहता है।

- इनवर्टर के कनेक्शंस के लिए रबड़ इंस्युलेटेड वायर का ही प्रयोग करें, नहीं तो ये तार घर में रहने वाले लोगों के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकते हैं।

- इनवर्टर यूनिट को बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें। 110 वोल्ट का करंट किसी के लिए भी घातक होता है।

- इसे हमेशा सूखे और समतल स्थान पर रखें। किसी गीले पदार्थ को इनवर्टर के संपर्क में न आने दें। बारिश या मौसम में नमी होने पर इनवर्टर को बचाकर रखें ।

- इनवर्टर में अच्छी कंडिशन की बैटरी का ही प्रयोग करें। बैटरी चेक करने के बाद ही इनवर्टर से कनेक्ट करें। पहले यह सुनिश्चित कर लें कि बैटरी फुल चार्ज और बढि़या कंडिशन में है।

- इनवर्टर को हवादार स्थान पर रखें। यह भी चेक कर लें कि इनवर्टर में इंटर्नल फैन लगा है या नहीं।

- इनवर्टर को बैटरी से कनेक्ट करते समय केबल के साइज का ध्यान रखें। केबल उचित आकार का होना चाहिए। ज्यादातर कंपनियां चार से 10 फुट के केबल की सलाह देती हैं।

- एल्युमीनियम वायर का प्रयोग न करें। इसका रेजिस्टेंस कॉपर के वायर की तुलना में ज्यादा होता है, इसलिए कापर वायर का ही प्रयोग करें।

प्रकाशन तिथि: 24 अप्रैल, 2010   
कृपया इस सार का मूल्यांकन करें : 1 2 3 4 5
अनुवदा करें भेजें Link प्रिंट

New on Shvoong!

Top Websites Reviews

X

.