India Today
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प्रकाशन तिथि: जनवरी 04, 2008
अमिताभ श्रीवास्तव क लेख पढकर बस एक हि विचार उभरा कि मां -बाप के गुनाहो की सजा
मासूम क्यों भुगत रहे है,उनके बारे में सरकार को सोचना होगा,यदि सरकार सजा देने का अधिकार
पाना चाहती है तो बेगुनाह मासूमो की देखरेख उसी दिन से स्वयं सुनिश्चित करें । बच्चों को
बिना अपराध जेल में रखना,जेल में पालना और और छः साल तक क़ैद मे रखना ,क्या उन्हे
अच्छा नागरिक बनने मे मदद करेगा? बिहार में 1340 महिला कैदीयों कि 253 बच्चे जेल मे पलते
है। यह सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है। ये आजाद देश के बच्चे है।