The Hindu
Summary rating: 4 stars
3 समीक्षा
विजिट्स:
290
शब्द:
600
प्रकाशन तिथि: नवम्बर 14, 2007
बच्चों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार हो रहा है...
आज १४ नवम्बर है और बालदिवस बडे धूमधामसे मनाया जा रहा है.बच्चें आने वाले कल के सूत्रधार है.देश की उन्नति और खुशहाली का जिम्मा आज हमारे कंधों पर है तो कल हमारे बच्चों के कंधों पर होगा. आज हम देश के रक्षक है तो कल रक्षा का जिम्मा हमारे बच्चों ने उठाना है.यह सब जानते हुए भी हम बच्चों को क्या दे रहे है? ऐसी स्कूली शिक्षा दे रहे है जो बच्चों के मन में एक डर की भावना पैदा कर दें? अपनेआप को एक अपराधी मानने की भावना पैदा कर दें? मानसिक तौर पर कमजोर बना दें?
देश की इतनी तरक्की होने के बावजूद भी बच्चों का हाल तो अब भी बुरा ही है.....जानते है आप स्कूलों मे सरेआम छडीसे बच्चों की पिटाई हो रही है. कारण कुछ भी हो... चाहे होम-वर्क न किया हो,देर से स्कूल आए हो, किताब घर भूल गए हो,लंच्-बॉक्स ना लाए हो या यूनीफॉर्म गंदी हो,सजा दी जाती है पिटाई करके!
भारत के बिहार् उत्तरप्रदेश,राजस्थान और आंध्र प्रदेश में इस मसले पर अध्ययन किया गया और पाया कि इन प्रांतों के स्कूलों में,शिक्षकों के हाथ में छडी अवश्य पाई गई....आखिर ऐसा क्यों है?
...कुछ बच्चियों का कहना था कि हररोज लगभग ५-६ बच्चों की पिटाई तो जरुर होती ही है.कोई न कोई गलती बच्चों से हो ही जाती है... पर टीचर प्यार से समझाने की बजाए सीधे छडीसे ही काम लेना शुरु कर देते है.बच्चों को ठोकर मारना,भूखा रखना,किसी जगह बांध कर पिटाई करना और उनसे कठोर शारिरिक काम करवाने जैसे मामले भी सामने आए है.
पूछे जाने पर शिक्षकों का और कुछ अभिभावकों का भी कहना है कि बच्चों को सुधारने का यही एक तरीका है.इससे बच्चें अनुशासन का पाठ सीखते है.तथ्य स्वीकार करनेमें में इन लोंगों को झिझक तो अवश्य हुई पर्...क्या अनुशासन सीखाने का यह तरीका सर्वथा योग्य है?
प्लान इंडिया की कार्यकारी अध्यक्षा भाग्यश्री डेंगले कहती है कि ''यह एक गंभीर मुद्दा है.''एक पुस्तक''स्पेयर द रॉड'' जारी की गई है. इसमें कॉमिक्स द्वारा इस तथ्य को दर्शाया गया है कि स्कूलों मे बच्चों के साथ क्या हो रहा है! शारीरिक सजा के विरुध्द अभियान की.. इस पुस्तक द्वारा शुरुआत की गई है.बच्चों ने भी इस पुस्तक के लिए सहयोग दिया है.इसमें स्टिकमैन का चरित्र है, जो बच्चों और शिक्षकों को संवेदनशील बनाने में अच्छा योगदान प्रदान करेगा.