Summarize Human Knowledge

.

श्वूंग होम>समाचारपत्र>भारत>(मीडिया तुम्हारी जात क्या है!)हंस

.

(मीडिया तुम्हारी जात क्या है!)हंस

द्वारा : Mahendra Yadav    


इसमें कोई दो राय नहीं कि भारतीय मीडिया, यानी अखबार, पत्र-पत्रिकाएं और टीवी चैनलों पर सवर्ण मानिसकता पूरी तरह हावी है। यहां
तक कि ये वर्ग उन्हीं खबरों को खबर मानता है,जिसमें उनके हित छिपे हों। उनके खिलाफ जाने वाली बड़ी से बड़ी खबर उनके लिए अखबार के किसी कोने में छापने लायक भी नहीं है। जाने-माने टीवी पत्रकार मुकेश कुमार के हंस मासिक पत्रिका के जुलाई अंक में छपे इस लेख में सवर्णवादी मीडिया की पोल पूरी तरह खोली गई है। पिछले वर्ष चले आरक्षण विरोधी आंदोलन में मीडिया की मानसिकता पूरी तरह सामने आ गई थी,जिसके बाद ही मुकेश कुमार ने ये लेख लिखा था।चंद आरक्षण विरोधी डॉक्टरों की हड़ताल या धरने को हमेशा डॉक्टरों की हड़ताल बताया गया। मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह के खिलाफ बड़ी बड़ी खबरें छापी गईं। पूरे घटनाक्रम के दौरान आरक्षण समर्थक भी सक्रिय रहे और अपने काम पर भी डटे रहे, लेकिन मीडिया ने इस बात को बिलकुल भी तरजीह नहीं दी।यहां तक कि ये बात भी छिपाई जाती रही कि मेडीकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों की ज्यादातर सीटें डोनेशन से भरी जा रही हैं और इसमें कोई शक नहीं कि ये सारी सीटें सवर्णों को ही जाती हैं। इन सीटों से चुने गए डॉक्टरों या इंजीनियरों की मेरिट पर भी कोई सवाल नहीं उठाए जाते। मुकेश कुमार के लेख मीडिया तुम्हारी जात क्या है, पढ़कर भी मीडिया पर हावी समुदाय को आग ही लगी होगी। इसी कारण हंस के मार्च के अंक में तुषारकांत ने मुकेश कुमार की मानसिकता और विचारों को उनके इस लेख के कारण जी भरकर कोसा।
मुकेश कुमार हंस के अंकों में लगातार मीडिया के बारे में सारगर्भित लेख और टिप्पणियां लिख रहे हैं।
प्रकाशन तिथि: मार्च 08, 2007
कृपया इस सार का मूल्यांकन करें : 1 2 3 4 5

Bookmark & share this post

.