कोहरे
की ओत में सफलता
जब फ्लो चाद्विक्क ने आगे देखा , तो उसे कोहरे की दीवार के सीवाए कुछ नही
दीखा । उसका शरीर सुन्न हो रहा था । वह लगभग १६ घंटे से तैर रही थी । वह
इंग्लिश चॅनल को दोनों दीशावो में तैरकर पार करने वाली पहली महिला थी ।
अब ३४ साल की उम्र में उसका ऍम यह था की वह कैतिलिना आइलैंड से
कैलिफोर्निया के कीनारे तक तैरने वाली पहली महीला बन जाए । ४ जुलाई , १९५२
की सुबह समुन्द्र बर्फ की तरह ठंढा था और कोहरा इतना घना की उसे रक्चक
नौकैये भी नही दीख रही थी । शार्क मछलिया तैरकर उसकी तरफ आ रही थी और
रायफल की गोलियों के कारन ही वंहा से भाग रही थी । समुन्द्र की ठंढी जक्रण
के बीच वह घंटो तक जूझती रही और लाखो लोग उसे टीवी पर देखते रहे ।
फ्लोरेंस के पास ही एक नाव चल रही थी ,जिस पर उसकी माँ और उसका प्रसिक्चक
उसको प्रोत्साहन दे रहे थे । उन्होंने उसे बताया की अब ज्यादा दुरी नही
बची हैं , लेकिन उसे तो सिर्फ कोहरा ही दीख्याई दे रहा था । उन्होंने उसे
प्रेरित कीया की वह हीमत न हरेउसने कभी हीमत नही हरी थी। जब सिर्फ आधा मील
की दुरी बची ,तो उसने मदद मांगी की उसे बाहर नीकाल लिया जाए । कुंछ घंटो
बाद अपने ठंढे शरीर को गर्म करते हुए उसने संवाददाता को बताया , देखिये
मैं बहाना नही बना रही हु , लेकीन अगर मैं जमीं को देख सकती तो यह यात्रा
पुरी कर लेती । उसे थकान या ठंढे पानी ने नही कोहरे ने हराया था । वह अपने
लक्छ्य को नही देख पाई थी । २ महीने बाद उसने फिर कोशिश की ।
इस बार
भी उतना ही घाना कोहरा था, लेकिन वह पुरी आस्था के साथ तैरी और उसके दीमाग
में लक्च्या की स्पस्ट तस्वीर थी । वह जानती थी की कोहरे के पीछे जमीं हैं
और इस बार उसने यह काम कर दीखाया । फ्लोरेंस चाडविक कैतीलिना चैनल तैरने
वाली पहली महीला बन गई और उसने पुरुषों के रिकार्ड को २ घंटे के अन्तर से
तोड़ दीया ।