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प्रकाशन तिथि: अप्रैल 19, 2008
सप्ताश्व कोई संस्था नहीं अपितु पारदर्शिता, आत्मस्थता, अनुरूपता एवं निर्मल अभिज्ञान हेतु एक मानवीय आह्वान है। इस सभा में आप सबका स्वागत है- यह है आह्वान 'सप्ताश्व' सभा का।
'सप्ताश्व-सभा' की मूल अवधारणा के अनुसार मन के स्तर पर पारदर्शिता, बुद्धि के स्तर पर आत्मस्थता, चेतना के स्तर पर अनुरूपता एवं अस्तित्व के स्तर पर निर्मल अभिज्ञान मनुष्य की आध्यात्मिक यात्रा का आरम्भिक बिन्दु है। इसके पूर्व जो भी चर्चा अध्यात्म के नाम पर की जाती है, वह मात्र जबानी जमाखर्च है- ऐसा कह कर यह ब्लाग प्रचलित आध्यात्मिक चर्चाओं की प्रासंगिकता एवं विश्वसनीयता पर एक प्रश्नचिन्ह लगाता है।
ब्लाग के प्रणेता श्री कौत्स के अनुसार 'सप्ताश्व-सभा' का सूत्रपात वर्ष 2008 की वसन्तपंचमी को अयोध्या में हुआ है जो उत्तर प्रदेश की एक सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक नगरी है जहां यह सभा प्रत्येक माह में दो बार आयोजित होती है।
'सप्ताश्व-सभा' का उद्देश्य अंतत: हमें निर्विवाद सत्य तक पहुंचना है, जिसकी नींव पर वैश्विक धर्म की स्थापना हो सके। इस दृष्टिकोण से हमें इस प्रयास को धन्यवाद ही कहना चाहिए।