Dainik jagran
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प्रकाशन तिथि: जनवरी 15, 2008
जन भावनाओं की अगुवाई कर रही हैं फिल्में: जॉन
Jan 14, 03:17 pm
मुंबई। लगता है ब्लॉग का चलन फिल्मी सितारों में बढ़ रहा है। आमिर खान,अजय देवगन और जॉन अब्राहम एक्टिव ब्लॉगर हो गए हैं। युवा दर्शकों के बीच लोकप्रिय जॉन अब्राहम ने अपने ब्लॉग पर ताजा पोस्ट में लिखा है कि इन दिनों जन भावनाओं की अगुवाई करने वाली फिल्में बन रही हैं। पहले फिल्में जन भावनाओं का अनुगमन करती थीं। फिल्मों में नया खून आ चुका है और यह नए जोश के साथ काम कर रहा है। नए विचारों को जमीन मिल रही है।
रविवार को लिखे अपने पोस्ट में जॉन अब्राहम ने बड़ी ईमानदारी से स्वीकार किया है कि अपनी व्यस्तता और भागदौड़ के कारण मुझे लगता है कि मैं दुनिया से कट गया हूं। मुझे इंडस्ट्री के उन लोगों पर आश्चर्य होता है,जो समय के सच और अपने दर्शकों के नियमित संपर्क में रहते हैं। उनके इस पोस्ट का शीर्षक है-कुछ बदल गया जब हम सोए थे। उन्होंने लिखा है कि जब भी मैं बाहर से लौटता हूं तो पाता हूं कि मुंबई और देश में थोड़ा बदलाव आ गया है। एक हफ्ते के अंतर में ही यह बदलाव दिखाई पड़ता है। एक महीने का बदलाव तो अचंभित करता है। उन्होंने फिल्मों के न चलने के संदर्भ में आगे लिखा है कि मार्केटिंग से जुड़ा कोई भी व्यक्ति अच्छी तरह जानता है कि किसी भी उत्पाद के न चलने के पीछे उसका खराब होना नहीं है,बल्कि उसे गलत दर्शकों (ग्राहकों) के बीच ले जाना है। हमें इस लालच से बचना चाहिए कि हर फिल्म हर दर्शक देखेगा। नए विषय और नए दर्शकों की खोज का साहस कम फिल्मकार कर पाते हैं। जॉन अब्राहम ने गुरुदत्त का उल्लेख किया है और लिखा है कि उन्होंने नयी राह दिखायी और उसकी कीमत चुकायी। उन्होंने युवा फिल्मकारों की तारीफ करते हुए बताया है कि वे नयी जमीन तलाश रहे हैं। अपने बारे में वे लिखते हैं कि लोग मुझ से पूछते हैं कि मैं क्यों अपारंपरिक और नए निर्देशकों के साथ काम करता हूं? जवाब देते हुए वे लिखते हैं कि मुख्य धारा के फिल्मकारों के साथ काम करने के लिए काफी स्थापित एक्टर हैं। नए विचारों के साथ आए युवा फिल्मकारों का समर्थन कौन करेगा?