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Dainik jagran

Review by : opendrauttam
विजिट्स: 58
शब्द: 300
प्रकाशन तिथि: जनवरी 13, 2008
लतीफ़े
 


पति (पत्नी से)- कान खोलकर सुन लो।
पत्नी (पति से)- कमाल है। तुम मेरी बात इस कान से सुनकर उस कान से निकाल देते हो।
पति- और तुम दोनों कानों से सुनकर मुंह से निकाल देती हो।
 

रोहन (नाई से)- बाल काटने तथा शेव का क्या रेट है?
नाई (रोहन से)- बाल कटाई के दो रुपए और शेव के आठ आने।
रोहन- तो भैया तुम मेरे सिर की शेव बना दो।
 

एक दिन संता ने होटल में दो अंडे तथा चाय मंगवाई। जब बिल आया तो उसमें अंडों के दस रुपए लिखे थे।
संता ने होटल के मैनेजर से पूछा- क्यों अंडे इधर मुश्किल से मिलते हैं?
मैनेजर- नहीं आप जैसे लोग बड़ी मुश्किल से मिलते हैं।
 

जब मोहन को सोहन के घर ठहरे एक महीना हो गया तो घर वाले काफी परेशान हो गए। एक दिन सोहन का छोटा पुत्र राजू बोला- अंकल, अब आप दिल्ली नहीं आएंगे क्या?
मोहन बोला- क्यों नहीं बेटा, जरूर आएंगे, बल्कि साल में तीन-चार बार आएंगे।
राजू ने पूछा- लेकिन जब आप यहां से जाएंगे नहीं तो आएंगे कैसे?
 

रोगी (डॉक्टर से)- डॉक्टर आप मेरे मित्र हैं। आपको फीस देते हुए संकोच होता है। इसलिए मैंने सोचा है कि अपने वसीयतनामे में मैं आपका यह कर्जा भी चुका दूं। आज मैंने वह वसीयतनामा भी तैयार करा दिया है।
डॉक्टर (रोगी से)- अगर ऐसी बात है ग्रोवर साहब, तो मैं आज से आपकी दवा भी बदल रहा हूं।
Dainik jagran         
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