'कमीने' फिल्म का नाम इसका अर्थ देने में शायद उतना सक्षम न हो, जितना इसका भाव है। फिल्मों के नामों में भले ही इसने एक नए दौर
की शुरूआत की हो, लेकिन फिल्मी कथानक के अनुसार ये एक सामान्य फिल्म है। हां सोच और फिल्मांकन नया है। मसलन, स को फ कहलवाने की फालतू कोशिश या एक संगीत की धुन को शब्दों मे ढ़ालने की कोशिश। फिल्म का आधार सच्चाई-बुराई और एक दूसरे के साथ उलझने की उधेड़बुन।
कमीने को पेश करने के लिए जिन दृश्यों का सहारा लिया गया है, उनमें निर्देशक की समझ का पता चलता है। वो जमीनी भी है, और आसमानी भी। हॉस्टल में अपना हाथ जगन्नाथ की लाइन हो, स्मगलिंग किंग को उसकी बीवी को अफ्रीकी पेंटिंग देने का सीन।
फिल्म का पहला गाना एक सामाजिक संदेश है, जो बड़ी कोशिश है। एड्स की जागरूकता को दिखाने की भली कोशिश। हां इसके ठीक बाद का सीन थोड़ा रियल करता है। हीरो और हीरोइन की नादानी दिखती है। यानि संदेश और एक्शन का गैप साफ झलकता है।
फिल्म का निर्देशन पक्ष जोरदार है। क्लाइमेक्स में बम धमाके के बाद के माहौल का अच्छा दृश्य बनता है।
इस फिल्म को एक नजर से देखने पर संतुष्टि और दूसरे से देखने पर क्षोभ होता है। सामाजिक कार्यकर्ता भी खुश गुंडा भी खुश। फिर जबरदस्ती का घालमेल कहानी को बेतुका बनाते है। या कहें कि इसे फिल्म बनाते है।
खैर, परिवार के साथ अब फिल्म देखना फैशन में नहीं रह गया। ये महंगा भी है, और शर्मीला भी। सो एक बार तो इस कमीने को देख सकते हैं। अकेले, बीवी या प्रेमिका के साथ।
भव्य