के. बालाचंदर द्वारा निर्देशित, 1981 में रिलीज़ हुई हिन्दी फ़िल्म 'एक दूजे के लिए' एक बहुत
ही बड़ी हिट साबित हुई। डायरक्टर - बालाचंदर, कलाकार - कमल हासन, रति अग्निहोत्री और माधवी, गायक -
एस. पी. बालासुब्रमनियम की यह पहली फ़िल्म थी और पांचो को ही सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए
फ़िल्मफेयर अवार्ड मिला।
यह फ़िल्म कई मायनों में मील का पत्थर साबित हुई। कहानी में नयापन लिए सामजिक बन्धनों के ख़िलाफ़ उत्तर-भारतीय लड़की और दक्षिण-भारतीय लड़के की प्रेम कहानी। आनंद बक्षी के लिखे शानदार गीत आज भी वर्तमान के गीतकारों से कही आगे और उन्हें शर्मिंदा करते प्रतीत होते हैं। लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल का मदहोश करदेने वाला संगीत। 'सोलह बरस की ....' और 'तेरे मेरे बीच में ....' जैसे गाने कानो में मिश्री घोल देते हैं और दिल में एक टीस सी उठ जाती हैं। अगर भाषा पर ध्यान न दे तो मैं इसे "एक कातिल प्रेमकहानी " कहूँगा।
जहाँ एक ओर कहानीकार/निर्देशक ने दो प्रेमियों की एक दूसरे के लिए बेइन्तहा मुहब्बत और दीवानगी की हद को पार कर जाने वाला जूनून पेश किया है, वही कमल और रति ने अपने-अपने अभिनय से नयी ऊंचायिओं को छुआ है। सह-अभिनेत्री के रूप में माधवी ने भी खूब प्रशंसा बटोरी। लिफ्ट में फिल्माया गीत - 'मेरे जीवन साथी ...' के बोल आज भी कितने 'अडवांस' लगते हैं। एस. पी. बालासुब्र्मनियम ने अपनी पहली ही फ़िल्म में अपनी आवाज में कमाल की कशिश पैदा की। लता जी के लिए कुछ भी कहना सूरज को दिया दिखाना है। फ़िल्म का अंत दुखद है , हालाकि कहानीकार ने अंत बदलने का आग्रह ठुकरा दिया था।
सपना और वासु दो बिल्कुल विपरीत, उत्तर और दक्षिण संस्कृतियों से हैं। उनके माँ -बाप कट्टरपंथी और रूढिवादी हैं। दोनों में प्यार होता है पर परिवार बीच में आ जाता है। दोनों को षड़यंत्रवश अलग कर दिया जाता है और उनके बीच दरार पैदा करने की कोशिश की जाती है। दोनों पागल से हो जाते हैं और घरवालों की मर्जी के विरूद्व घर से भाग जाते हैं। पर किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था। दो संस्कृतियों की टकराहट में मासूम सपना और वासु निश्चय करते हैं की भले ही वे साथ-साथ जी न पाये पर साथ-साथ मर तो सकते हैं।
फ़िल्म रुला देने वाली है। सम्वाद उत्तम। कमल का साउथ-इंडियन 'एक्सेंट' उनके अभिनय को बहुत ही 'इनोसेंट' और 'रोमांटिक' बना देता है। फ़िल्म ने बॉलीवुड जगत में 'लव-स्टोरी' को एक नया आयाम दिया और बाद में तो ऐसी बहुत से फिल्मे बनी जिनमे - 'क़यामत से क़यामत तक' सफल रही।
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