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फिल्म 'अंधा कानून'...एक सच्चाई।
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Summary rating: 5 stars
(2 समीक्षा)
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विजिट्स : 59
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शब्द:600
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फिल्म 'अंधा कानून'...एक सच्चाई।
...........इस फिल्म के मुख्य कलाकार है...रजनीकांत, हेमा मालिनी , अमिताभ
बच्चन , रीना रॉय.
.........कहानी में वास्तविकता दर्शाने का भरपूर प्रयास किया गया है।.... इस फिल्म की कहानी रजनीकांत के इर्द-गिर्द ही धुमती है।... यह एक के बाद एक गुनाह करता चला जाता है... कानून इसका कुछ भी नहीं बिगाड सकता।.... हेमा मालिनी इसकी बहन की भूमिका में है और रीना रॉय, प्रेमिका की भूमिका में है।.... हेमा मालिनी पुलिस इन्सपेक्टर है और अपना फर्ज निभाने में यकीन कर रही होती है।
.......... हेमा मालिनी जानती है कि गुनहगार उसका अपना सगा भाई है।.... फिर भी वह रिश्ते से ज्यादा अपने फर्ज को अहमियत देते हुए रजनीकांत को सबूतों के साथ पकडने की पूरजोर कोशिश करती है, लेकिन रजनीकांत उसकी हर कोशिश नाकाम करने में सफल रहता है।
........... बचपन में रजनीकांत और हेमा मालिनी के पिता की हत्या हो जाती है।... रजनी कांत हत्यारों को ढूंढ निकाल ने में सफल हो जाता है, लेकिन किसी भी सबूत के अभाव में वह उन्हें कानून के हवाले नहीं कर सकता। हत्यारों को सजा तो दिलवानी होती ही है.... वह कानून अपने हाथ में ले कर उन्हें घेर लेता है।... यहां हत्यारे तीन है।
.......... रजनीकांत एक के बाद एक करके उन तीनों हत्यारों को को मौत के घाट उतार देता है। उनको मौत के घाट उतारने के उसके तरीके अलग अलग है और यही इस फिल्म का मुख्य आकर्षण है।...एक हत्यारे को सडक पर भगाते हुए किसी कार की चपेट में पहुंचा कर मौत के घाट उतार देता है।.... दूसरे हत्यारे को बहुत ज्यादा शराब पिला कर बाथ-ट्ब में डूबो कर यमलोक पहुंचा देता है ... और तिसरे हत्यारे को उसी के साथी की गोली का निशाना बना कर रास्ते से हटाता है।......... अपराधियों को जान से मार कर भी हर बार रजनीकांत कानून के शिकंजे से बच कर निकल जाता है और उसकी बहन हेमा मालिनी हाथ मलती रह जाती है।
......... अमिताभ बच्चन भी अपराधियों के बुने जाल में फंसा एक इमानदार व्यक्ति है।.... उस पर किसी व्यक्ति का खून करने का झूठा आरोप मढ दिया जाता है और उमर कैद की सजा हो जाती है।.... सामाजिक तत्वों से परेशान उसकी पत्नी; अपनी बेटी को जहर दे देती है और खुद भी आत्महत्या कर लेती है।..... असलियत में जिस व्यक्ति के खून के अपराध में अमिताभ को उमर कैद की सजा मिली होती है, वह व्यक्ति जिंदा होता है।.... उम्र कैद की सजा काट कर अमिताभ जब बाहर निकलता है, तब उसकी मुलाकात रजनीकांत से हो जाती है।
..... आखिरकार अमिताभ बच्चन को वह अपराधी मिल ही जाता है जिसके खून का इलजाम उसके उपर लगाया गया होता है।... वही व्यक्ति रजनीकांत के पिता का भी हत्यारा होता है।... उसे हहेमामालिनी गिरफ्तार करके कोर्ट के सामने खडा कर देती है और कोर्ट में ही अमिताभ बच्चन उसको गोली मार देता।.... जजसे कहता है कि ' मै तो इसके खून के अपराध में उमर कैद की सजा काट चुका हूं, दुबारा इसी व्यक्ति के खून का इलजाम मुझ पर कैसे लग सकता है?".... और अमिताभ बच्चन पर कोई केस नहीं बनता।
......इस तरह से इस फिल्म में दिखाया गया है कि हमारा कानून कितना अंधा है और इसका गलत इस्तेमाल अपराधी, किस ढंग से करतें है।
प्रकाशन तिथि:
अप्रैल 13, 2009
ambalika के द्वारा और अधिक संक्षेपण
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