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फिल्म 'आंखे' की बारह आंखें....

द्वारा : ambalika    


     फिल्म 'आंखे' की बारह आंखें....
........फिल्म आंखे के सितारे है... अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, अर्जुन रामपाल,
परेश रावल, आदित्य पंचोली और एक अदद हिरोईन सुष्मिता सेन।.... अब इतने चमकें सितारों की फौज है तो फिल्म भी अच्छी बन पडी है.... शक की कोई गुंजाइश नहीं है।
......... हम भी कोई ऐसे वैसे सिर् फिरे नहीं है जो बारह आंखों की बात कह कर चुप बैठ जाए।.... छह सितारों के नाम हमने गिनवाए है तो बारह आंखों का हिसाब भी दे रहे है।.... फिल्म अंधों की करामात दिखाने की तुक बंदी पर बनी है तो क्या हुआ.... सब चलता है।... सब्जेक्ट कोई भी हो, फिल्म वाले उसे तोड- मरोड कर छोटा, बडा, लंबा, टेडा-मेडा या तुडा-मुडा बनाने में माहिर होते ही है.... यह सभी जानते है... हमें इस पर अलग से प्रकाश फैंकने की क्या जरुरत है?
........ तो ये फिल्म 'आंखे' अंधों के कंधे पर बंदूक रख कर चलाई गई गोली है।.... बैंक अंधों को ट्रैंड करके भी लूटे जा सकतें है.... यह फिल्म ऐसा ही संदेश दे रही है।... हालाकि फिल्मी ड्रामा ही है।... कहानी में सच्चाई रत्तीभर की भी नहीं है।
..........इस फिल्म में अब एक के बाद एक कलाकार कैसे अभिनय का जलवा दिखातें है.... जरा इस पर नजर डालतें है।.... इस फिल्म में सबसे ज्यादा ध्यान खिंचा है, अर्जुन रामपाल ने।.... बहुत बेहतरीन अभिनय का जलवा दिखाया है।दूसरे नंबर पर है, परेश रावल।.... मंजे हुए कलाकार है... हंमेशा अभिनय के मामले में फर्स्ट या सेंकंड से कभी नीचे उतरतें ही नहीं है।
......... अब चौंकिएगा मत।... तिसरे नंबर पर यहां आदित्य पंचोली है.... फिल्म में इनकी भूमिका को चाहे कम फूटेज क्याओं न मिला हो... इनका बेहतरीन अभिनय और डायलॉग बोलने का स्टाईल अनोखा है।
..........चौथे नंबर पर है..... अक्षय कुमार।... अभिनय को इन्हों ने इस फिल्म में कंजूसी से परोसा है।... शायद उस समय सोच रहे होंगे कि बीग-बी.... अमिताभ बच्चन के सामना कैसे किया जाए?... इसी उधेड-बुन में लगे हुए दिखतें है।
..........पांचवे नंबर पर अमिताभ बच्चन है... इस फिल्म के मुख्य सुत्रधार है।.... शायद दूसरे कलाकारों की तरफ ज्यादा ध्यान देने में लगे रहे... और अपने पात्र पर कॉन्सन्ट्रेशन नहीं कर पाये... ऐसा लग रहा है।... एन्ग्री यंगमैन से एन्ग्री बुझुर्ग बनने में कोई दिक्कत भी आ रही होगी।
...... और अदद एक हिरोईन सुष्मिता सेन छठे नंबर पर खडी है।... इसके लिए अकेली हिरोईन होने की वजसे अभिनय के जलवे बिखेरने के लिए पूरा मैदान था।.... दूर दूर तक कोई साइड हिरोईन भी नहीं थी.... खुद भी सौदर्य की मलिका थी.... फिरभी अभिनय से फिल्म में छा जाना ये क्यों भूल गई?... वही बता सकती है।
...... फिल्म में कोई कमी नहीं है..... मनोरंजन इस फिल्म की मजबूत नीव है।.... फिल्म एक से ज्यादा बार देखने पर भी बोरियत नहीं महसूस होगी।

प्रकाशन तिथि: मार्च 31, 2009
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