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काश.... मेरे होते।

द्वारा : ambalika    


     काश.... मेरे होते।
.............फिल्म का नाम ही इस बात की चुगली खाता है कि फिल्म में हीरो और हिरोइन का
मेल-मिलाप हुआ नहीं है।... वैसे फिल्म है भी प्रणय त्रिको॑ण।...दो हिरोइनों में से हीरो दोनों को भला कओसे मिल सकता है?... किसी एक को ही मिलेगा और दूसरी कहेगी कि 'काश...मेरे होते।
...................कृष कपूर( कुमार साहिल) एक पेंटर औरो फोटोग्राफर भी है।... उसे कंपनी एक महीने के लिए मॉरिशस भेजती है।... विदेश पृष्टभूमि अनायास ही सामने आ जाती है।... वहां वह किराए पर कमरा ले कर रहता है।... मकान मालिक है मि.बत्रा( राजेश खन्ना)।..... वैसे कृष कपूर पोर्ट लुईस जैसी सुंदर जगह पर रह रहा होता है।.. मि. बत्रा अवकाश प्राप्त सेना के अधिकारी है।... उनकी पत्नी की मूत्यु हो चुकी है।... एक सुंदर बेटी है.... उसकी उमर १७ साल है...उसका नाम है कीया।... यह किरदार  साना मिर्जा निभा रही है।... अब कीया को कृष से प्यार हो जाता है।.... प्यार तो होना ही था।.... प्यार होना कई बार बहुत जरुरी होता है।
................लेकिन कृष को कीया से प्यार नहीं है।... जरुरी नही कि प्यार दो तरफा हो.... एक तरफा प्यार भी तो, प्यार ही होता है।
.............अब कीया तो कृष के प्यार में इतनी पागल हो जाती है कि कृष की बचपन की फोटो चुराकर उसकी पूजा करनी शुरुकर देती है।.... उसे एक दिन पता चल जाता है कि कृष तो राधिका( स्नेहा उल्लाल) से प्यार कर रहा है।... अब राधिका से कृश को मुक्त करने के लिए कीया हिप्नोटिस्म का प्रयोग करती है, जो फेल हो जाता है। उसके बाद बदले की आग में जल उठ्ती है और कृष पर बलात्कार का आरोप लगाती है।... पुलिस से गिरफ्तार भी करवाती है। .....हे राम।.... ये भी क्या प्यार हुआ।
...............यह फिल्म कुछ कुछ  फिल्म 'गुप्त' की कहानी की याद दिल्वाती है। गुप्त की तरह ही इस फिल्म की ज्वलंत सफलता निश्चित है।... सभी कलाकरों का काम प्रशंसनीय है।... संजीव-दर्शन का संगीत जादू जादु जगाने वाला है। मॉरिशस को सुंदरतम बना कर दिखाया गया है।
 
प्रकाशन तिथि: जनवरी 10, 2009
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