कहानी है गोपाल (अजय देवगन) की, जो अपनी पत्नी एकता (करीना कपूर), बहन ईशा (अमृता अरोरा) और गूँगे साले लकी
(तुषार कपूर) के साथ रहता है। आम महिलाओं की तरह एकता को टीवी पर प्रसारित होने वाले सास-बहू के धारावाहिक बेहद पसंद हैं।
एक रात ऑफिस से लौटते समय गोपाल एक युवा और खूबसूरत महिला मीरा (सेलिना जेटली) को गुंडों से बचाता है, लेकिन इस चक्कर में वह मीरा के साथ पूरी रात एक नाव में फँसा रह जाता है।
सुबह जब गोपाल अपने घर पहुँचता है तो उसका सामना पत्नी एकता से होता है। धारावाहिक देख-देख कर शंकालु हो चुकी एकता को लगता है कि गोपाल पूरी रात अपने ऑफिस की किसी लड़की के साथ रंगरेलियाँ मनाकर घर लौट रहा है।
गोपाल से एकता झगड़ा करती है और उसकी बात नहीं मानती। हारकर गोपाल उसे एक मनगढ़ंत कहानी सुनाता है। वह कहता है कि पूरी रात वह अपने दोस्त एंथोनी गोंसाल्विस के घर रूका था। वह एकता को झूठा पता भी लिखवा देता है।
एकता को यकीन नहीं होता और वह एंथोनी को एक पत्र लिखकर मिलने के लिए बुलाती है। जब गोपाल को इस बात का पता चलता है तो वह अपने दोस्त लक्ष्मण (श्रेयस तलपदे) को राजी करता है कि वह एकता से एंथोनी गोंसाल्विस बनकर मिले और उसे यकीन दिलाए कि उस रात गोपाल उसके घर रूका था।
लक्ष्मण योजनाबद्ध तरीके से काम करता है और एकता संतुष्ट हो जाती है। मामला उस समय बिगड़ जाता है, जब सचमुच का एंथोनी गोंसाल्विस एकता से मिलने आ पहुँचता है। दरअसल उस पते पर सचमुच का एंथोनी रहता है।
इसी बीच गोपाल को पता चलता है कि उसने जहाँ पर गुंडों को मीरा से बचाया था, वहीं पर एक लाश पुलिस को मिलती है। पुलिस अफसर माधव (अरशद वारसी) इस मामले की जाँच कर रहा है। माधव और गोपाल एक-दूसरे को पसंद नहीं करते हैं। माधव को पता चल जाता है कि गोपाल उस रात घर से गायब था और यह लाश उसके ऑफिस के कर्मचारी की ही है। गोपाल कैसे इस मामले से बचता है, यह फिल्म में हास्यप्रद घटनाक्रमों के जरिए दिखाया गया है।