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श्वूंग होम>औषधि & स्वास्थ्य>Nutrition>डायबिटीज से कैसे करें बचाव

डायबिटीज से कैसे करें बचाव

द्वारा: pratima avasthi     लेखक : निर्मला मूणत
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डायबिटीज से कैसे करें बचाव
मधुमेह यानि डायबिटीज अब उम्र, देश व परिस्थिति की सीमाओं को लांघ चुका है। दुनिया भर में मधुमेह के मरीजों का तेजी से बढ़ता आँकड़ा एक चिंता का विषय बना हुआ है। इस लेख में मधुमेह के रोगियों के लिए कुछ देसी नुस्खे पेश किए गए हैं। लेकिन इनमें से किसी भी नुस्‍खे को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक की राय जरूर ले लें।

नींबू
मधुमेह के मरीजों को प्यास ज्‍यादा लगती है। अतः बार-बार प्यास लगने पर पानी में नींबू निचोड़कर पीने से प्यास कम लगती है और वह स्‍थाई रूप से शांत होती है।

खीरा
मधुमेह के मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन खाने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से बार-बार भूख लगती है। ऐसी स्थिति में खीरा खाकर अपनी भूख मिटानी चाहिए।

गाजर और पालक
मधुमेह के रोगियों को गाजर और पालक का रस पीना चाहिए। इससे आंखों की कमजोरी दूर होती है।

शलजम
मधुमेह के रोगी को तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का सेवन अधिक करना चाहिए। शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम हो जाती है। अतः शलजम की सब्जी और विभिन्‍न रूपों में शलजम का सेवन करना चाहिए।

जामुन
मधुमेह के उपचार में जामुन एक पारंपरिक औषधि है। यदि कहा जाए कि जामुन मधुमेह के रोगी का ही फल है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि इसकी गुठली, छाल, रस और गूदा सभी मधुमेह में अत्‍यंत लाभकारी हैं। मौसम के अनुरूप जामुन का सेवन करना चाहिए।

जामुन की गुठली भी बहुत फायदेमंद होती है। इसके बीजों में जाम्बोलिन नामक तत्व पाया जाता है, जो स्टार्च को शर्करा में बदलने से रोकता है। गुठली का बारीक चूर्ण बनाकर रख लेना चाहिए। दिन में दो-तीन बार तीन ग्राम चूर्ण का पानी के साथ सेवन करने से मूत्र में शर्करा की मात्रा कम होती है।

करेले
प्राचीन काल से करेले मधुमेह के इलाज में रामबाण माना जाता रहा है। इसके कड़वे रस के सेवन से रक्‍त में शर्करा की मात्रा कम होती है। मधुमेह के रोगी को प्रतिदिन करेले के रस का सेवन करने की सलाह दी जाती है। इससे आश्चर्यजनक लाभ प्राप्‍त होता है। नवीन शोधों के अनुसार उबले करेले का पानी मधुमेह को शीघ्र और स्थाई रूप से खत्‍म करने की क्षमता रखता है।

मेथी
मधुमेह के उपचार के लिए मेथी के दानों का प्रयोग भी किया जाता है। अब तो बाजार में दवा कंपनियों की बनाई मेथी भी उपलब्‍ध है। मधुमेह का पुराना से पुराना रोग भी मेथी के सेवन से दुरुस्‍त हो जाता है। प्रतिदिन प्रात:काल खाली पेट दो-तीन चम्‍मच मेथी के चूर्ण को पानी के साथ निगल लेना चाहिए।

गेहूं के जवारे
गेहूं के पौधों में रोगनाशक गुण होते हैं। गेहूं के छोटे-छोटे पौधों का रस असाध्य बीमारियों को भी जड़ से मिटा डालता है। इसका रस मनुष्य के रक्त से चालीस फीसदी मेल खाता है। इसे ग्रीन ब्लड भी कहते हैं। रोगी को प्रतिदिन सुबह और शाम में आधा कप जवारे का ताजा रस दिया जाना चाहिए।

अन्य उपचार
नियमित रूप से दो चम्मच नीम का रस और चार चम्‍मच केले के पत्ते का रस लेना चाहिए। चार चम्मच आंवले का रस, गुडमार की पत्ती का काढ़ा भी मधुमेह नियंत्रण के लिए रामबाण है। यह भी खोजें
प्रकाशन तिथि: 19 अक्तूबर, 2011   
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