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श्वूंग होम>औषधि & स्वास्थ्य>Nutrition>क्यों जरूरी हैं प्रोबायोटिक्स?

क्यों जरूरी हैं प्रोबायोटिक्स?

द्वारा: pratima avasthi     लेखक : दिव्येश गुप्ता
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    क्यों जरूरी हैं प्रोबायोटिक्स?  

प्रोबायोटिक ऐसे जीवित सूक्ष्मजीव होते हैं, जो प्राकृतिक तौर पर हमारी आँतों में पाए जाते हैं। साथ ही ये कुछ खाद्य पदार्थों में भी या तो प्राकृतिक रूप से उपस्थित होते हैं या फिर इन्हें उन खाद्य पदार्थों में मिलाया जाता है। ये हमारे शरीर में हानिकारक बैक्टेरिया को बढ़ने से रोकते हैं। डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही व कुछ पौधों में प्रोबायोटिक बैक्टेरिया होते हैं। इनका सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।

खास तौर पर यदि किसी बीमारी अथवा किसी दवाई के असर की वजह से हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से मौजूद प्रोबायोटिक्स में कमी आ जाती है तो डायरिया तथा मूत्र नली संबंधी इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इनकी प्राप्ति के लिए प्रोबायोटिक संपन्न पदार्थों का सेवन लाभकारी होता है।

हमारी बड़ी आँत असंख्य बैक्टेरिया से भरी हुई होती है। इनमें से कुछ हमारे शरीर के लिए रोग का कारण भी हो सकते हैं और जो अच्छे होते हैं, वे भोजन को पचाने का काम करते हैं तथा पाचन तंत्र को संतुलित रखने का काम करते हैं। प्रोबायोटिक भोज्य पदार्थों के सेवन से आँतों की कार्यप्रणाली को सशक्त बनाया जा सकता है, इन्फेक्शन से बचाव किया जा सकता है।

शोधों से ज्ञात हुआ है कि प्रोबायोटिक उत्पादों का सेवन करने से बड़ी आँत (कोलेन) का कैंसर के होने की संभावना बेहद कम हो जाती है। इसका सेवन मधुमेह, लोअर रेस्पेरिटी इंफेक्शन, इरीटेबल बॉवेल सिंड्रोम आदि के बचाव में बहुत कारगर सिद्ध हुआ है। इसके नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप की वृद्धि भी रुकती है।

प्रोबायोटिक मुख्यत: डेयरी प्रोडक्ट में ही होता है, जैसे दूध व दही में। भारत में कई कंपनियाँ प्रोबायोटिक दूध और दही बाजार में लाँच कर चुकी है। आप जो भी प्रोबायोटिक प्रोडक्ट खरीदें, उनका लेबल चेक करें व देखें कि उनमें लेक्टोबेसिलस और बायफिडोबेक्टेरियम है या नहीं।

प्रकाशन तिथि: 06 मार्च, 2011   
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