फल खाकर बढ़ाएं स्टेमिना
फलों व सब्जियों में मौजूद
एक खास एंटी-आक्सीडेंट क्वेर्सटिन हमारी स्टेमिना <काम व कसरत करने की क्षमता> बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक ताजा शोध में यह निष्कर्ष सामने आया है।
वैज्ञानिकों ने अपने प्रयोग में 12 चुस्त लड़कों को शामिल किया। सात दिन तकइन लड़कों को करसत करने के लिए कहा गया। इसके लिए इन्हें रोज
क्वेर्सटिन सप्लीमेंट्स दिए गए। सात दिनों बाद की गई जांच में इन लड़कों की कसरत करने की क्षमता यानी स्टेमिना ज्यादा पाया गया।
सेब, प्याज, बेरी, पत्ता गोभी, ब्रोकली के अलावा ग्रीन व ब्लैक टी में क्वेर्सटिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। शोधकर्ताओं की राय में एंटी-आक्सीडेंट्स, जलनरोधी व कोशिकाओं को ऊर्जा देने वाले यौगिक सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। एक अन्य प्रयोग में क्वेर्सटिन सप्लीमेंट्स से शरीर को ऊर्जा मिलने की जांच की गई। शोधकर्ताओं ने अध्ययन में शामिल लोगों की आक्सीजन लेने व साइकिल चलाने की क्षमता का आकलन किया।
शोध में शामिल लोगों को पहले सात दिन क्वेर्सटिन सप्लीमेंट्स देकर कसरत कराई गई। इसके बाद अगले सात दिनों तक बगैर सप्लीमेंट्स दिए कसरत कराई गई। जांच में पाया गया कि क्वेर्सटिन सप्लीमेंट्स लेने वाले लोगों की आक्सीजन लेने की क्षमता में चार और साइकिल चलाने की क्षमता में 13 फीसदी की वृद्धि पाई गई।
लंबी उम्र का राज
वैज्ञानिकों ने कम कैलोरी वाले भोजन को लंबे जीवन के लिए कारगर बताया है। शोधकर्ताओं की राय में भोजन में 30 फीसदी तक कैलोरी कम करके बूढ़े होने की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है। यही नहीं कम कैलोरी लेने से
कैंसर व हृदयरोगों का खतरा घटकर आधा रह जाता है और तीन गुना जीवन बढ़ जाता है।
अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने 76 रीहसस बंदरों को चुना। इंसानों के खून में पाया जाने वाला आरएच फैक्टर मूल रूप से इन्हीं बंदरों में मौजूद होता है। आरएच फैक्टर से ही ब्लड ग्रुप की पहचान होती है। इनमें से आधे बंदरों को 20 साल तक कम कैलोरी वाला भोजन दिया गया। बंदरों पर यह प्रयोग उस समय शुरू किया गया, जब वे वयस्क होने के शुरुआती चरण में थे।
शोध के मुताबिक कम कैलोरी वाला भोजन करने वाले 37 फीसदी बंदर आज भी जीवित हैं, जबकि सामान्य भोजन वाले महज 13 फीसदी बंदर ही जीवित रह सके। प्रमुख शोधकर्ता रिचर्ड वेनड्रच के मुताबिक 'मुझे लगता है कि बंदरों और अन्य जानवरों पर किए शोध से जो परिणाम मिले हैं, वे इंसानों पर भी लागू होने चाहिए।'
एक अन्य शोधकर्ता रिकी कोलमन के मुताबिक कम कैलोरी युक्त भोजन करने वाले बंदर ज्यादा स्वस्थ थे। उनकी त्वचा चमकदार थी और वे ज्यादा जवान नजर आते थे। यही नहीं उन्हें हृदयरोग, कैंसर व डायबिटीज जैसी बीमारियों के होने की संभावना भी कम पाई गई।