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अल्जाइमर से जो चेत गया वो बच गया

द्वारा: pratima avasthi    
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अल्जाइमर से जो चेत गया वो बच गया

भूलने की बीमारी के सामान्य रूप को अल्जाइमर कहा जाता है। जब किसी को अपना नाम न याद आ रहा हो या अपने बच्चों को पहचानने में दिक्कत हो रही हो, तो समझ लीजिए कि खतरे की घंटी बज चुकी है। यह याददाश्त को प्रभावित करने वाली एक मानसिक गड़बड़ी है, जिसे डिमेंशिया कहा जाता है। अल्जाइमर इसी मानसिक गड़बड़ी का सबसे सामान्य रूप है।

अल्जाइमर 60 साल साल या उससे अधिक उम्र के लोगों में हो सकता है। भारत में लगभग 37 लाख लोग डिमेंशिया के शिकार हैं और इनमें से 90 फीसदी अल्जाइमर से पीडित हैं। इस बीमारी का अनुवांशिक नाता होने के कारण दुनिया के लोगों में यह आस जगी है कि इस बीमारी पर अब नियंत्रण कर पाना संभव हो सकेगा।

इस गंभीर मर्ज से परेशान लोगों के लिए एक खुशखबरी है। ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर रोग से संबंधित दो प्रमुख जीन्स को खोज निकाला है। ये जीन्स सोलह हजार डीएनए नमूनों पर चिç±नत किए गए थे और ये कोलेस्ट्रॉल के विघटन के लिए जाने जाते हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस रोग के अनुवांशिक अध्ययन के जरिए इसके इलाज के नए रास्ते खुलेंगे। अल्जाइमर का अब तक कोई इलाज नहीं है। लक्षण की पहचान हो जाए तो दवाओं की मदद से इस समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है।

लक्षण
छोटी-छोटी चीजें जैसे चाबियां, रिमोट, गैस पर दूध इत्यादि रखकर भूल जाना।
घर का नंबर या रास्ता भूल जाना।
नींद न आना, भूख का ध्यान न रहना, खाना भूल जाना। हर समय तनाव में रहना, कुछ न कुछ सोचते रहना, चिड़चिड़ा होना, बात-बात पर गुस्सा होना इत्यादि इसके लक्षण हैं।

बचने के उपाय
नियमित तौर पर व्यायाम करने से याददाश्त बढ़ सकती है। यही नहीं, वे अधिक दिनों तक भूलने की बीमारी का शिकार होने से भी बच सकते हैं।
हल्दी के औषधीय गुणों में डिमेंशिया बीमारी से निजात दिलाने की ताकत होती है।
ग्रीन टी, मछली, टमाटर इत्यादि को अपने खानपान में शामिल करें । हरी सब्जियों और अंगूर,अखरोट आदि को अपने आहार में प्रमुखता से शामिल करें।
शहद को हर रोज किसी न किसी रूप में लेने से याददाश्त अच्छी रहती है । पका कद्दू हफ्ते में एक बार अवश्य खाएं।

कुछ सरल उपाय
पुरानी बात याद करने की कोशिश कीजिए।
हिसाब-किताब जुबानी जोड़ने-घटाने की कोशिश कीजिए।
पुराने एलबम देखिए।
प्रकाशन तिथि: 22 नवम्बर, 2011   
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