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भगवान में आस्था से दूर होता है दुख-दर्द

द्वारा : pratima avasthi    

लेखक : ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी
  भगवान में आस्था से दूर होता है दुख-दर्द

मशहूर
विचारक कार्ल मार्क्स ने कहा था कि धर्म लोगों के लिए अफीम की तरह है। सवाल यह है कि क्या ईश्वर में आस्था वाकई आपके दुख-दर्द को कम कर सकती है? अब वैज्ञानिक भी इसका जवाब हां में दे रहे हैं। उनका कहना है कि भगवान में आस्था रखने वाले लोगों को नास्तिकों की तुलना में दर्द का अहसास 12 फीसदी कम होता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि ईश्वर में आस्था रखने वाले लोग सकारात्मक रवैया अपनाकर दर्द को कम कर सकते हैं।
ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की एक टीम ने ईश्वर की आस्था की परखने के लिए टेस्ट किया। टीम ने 12 रोमन कैथोलिकों और 12 नास्तिकों को इलेक्ट्रिक शॉक दिया गया। इस दौरान ये लोग वर्जिन मैरी और लियोनार्दो द विंची की 'लेडी विद एन अर्माइन' पेंटिंग्स को देख रहे थे। इन लोगों को आधे घंटे तक एमआरआई स्कैनर में रखा गया। उन्हें चार सेशनों में 20 झटके दिए गए। जब वे पेंटिंग की ओर देखते थे, तो उन्हें होने वाले दर्द को माप लिया जाता था।
वैज्ञानिकों ने देखा गया कि कैथोलिकों को कम दर्द हुआ। ब्रेन स्कैनिंग से देखा गया कि उस दौरान कैथोलिकों के दिमाग में दर्द सहन करने वाला हिस्सा ज्यादा ऐक्टिव हो जाता था। इसके उलट, नास्तिकों के दिमाग में दर्द को सहन करने से जुड़ी कोई ऐक्टिविटी नहीं दिखी। रोमन कैथोलिकों ने बताया कि जब हम वर्जिन मैरी की पेंटिंग देखते हैं, तो खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। हमें लगता है कि गॉड हमारा ध्यान रख रहा है और हम शांत रहते हैं।
प्रकाशन तिथि: सितम्बर 30, 2008
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