पार्टी छोड़ने और बदलने के सिलसिले को पहले 'आयाराम गयाराम' कहा जाता था। दल बदलू एक तरह की गाली हुआ करता था। आज नहीं है। चार
धाम की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों की तरह हमारे नेता भी यहां से वहां जाते रहते हैं।
कल्याण सिंह :- उत्तर प्रदेश में भाजपा के इस नेता की जड़ें वैसे तो सन 47 से रही हैं। लगातार एमएलए भी बनते रहे, 80 को छोड़कर।
अक्टूबर 1999 में उत्तर प्रदेश में भाजपा के चुनावी नतीजों के बाद अटल बिहारी वाजपेयी को निशाना बनाते हुए इन्होंने कहा कि चिराग तले अंधेरा...24 नवंबर, 1999 में कल्याण सिंह भाजपा से निकाल दिए गए। इसके बाद इन्होंने राष्ट्रीय क्रांति दल के नाम से अपनी पार्टी बनाई। 2004 में वापस भाजपा में लौटे और अब फिर से भाजपा से बाहर चले गए।
राज बब्बर :- राजनीति में आने के पहले संकते तब मिले, जब मुंबई के एक होटल में चंद्रास्वामी के साथ इनकी तस्वीर देखी गई, लेकिन 1987 में वीपी सिंह के नजदीकी हुए और सियासी रैलियों में हिस्सा लिया। 1994 में ये समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। 2005 में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के साथ मिलकर जनमोर्चा खड़ा करने की कोशिश की। 5 अक्टूबर, 2008 को कांग्रेस में शामिल हो गए।
रामविलास पासवान :- 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर चुने गए। 1982 से 84 तक लोकदल से एमपी रहे। 1983 में दलित सेना बनाई। 1989 में जनता दल के टिकट से लोकसभा पहुंचे। जनता दल के टूटने के बाद जनता दल यूनाइटेड में शामिल हुए। 2000 में लोकजनशक्ति पार्टी बनाई। फिलहाल खुद के बनाए दल के नेता हैं।
शरद पवार :- 1967 में कांग्रेस में आए। बच्चों जैसे चेहरे के कारण इन्हें Baby Faced MLA कहा गया। 1982 में कांग्रेस (एस) बनाई। 1987 में फारुख अब्दुल्ला, राजीव गांधी और शरद पवार तीनों ने औरंगाबाद की रैली में हाथ मिलाए। 1999 में एनसीपी नाम से अपनी पार्टी बनाई।
पी चिदंबरम :- 1972 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए। 1996 में कांग्रेस छोड़कर मूपनार और एम अरुणाचल के साथ तमिल मानील कांग्रेस बनाई। 2001 में अपनी पार्टी कांग्रेस जननायक परवई। 2004 में कांग्रेस में फिर शामिल हुए।
एस बंगारप्पा :- पहले कांग्रेस में, फिर अपनी पार्टी बनाई। इसके बाद भाजपा और फिर समाजवादी पार्टी के साथ रहे। अब फिर कांग्रेस में।
आरिफ मोहम्मद खान :- अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष रहे। फिर कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत की। 1986 में राजीव गांधी सरकार में से मंत्री पद छोड़ा और 1988 में वीपी सिंह के साथ जनमोर्चा बनाया। फिर बसपा में शामिल हुए और जब बसपा ने भाजपा के साथ दोस्ती की तो पार्टी छोड़ दी। कुछ वक्त के लिए रामविलास पासवान की लोजपा के साथ रहे और फिर 2004 में भाजपा में शामिल होए। आजकल वहां भी नहीं हैं।
मदनलाल खुराना-
जनसंघ के जमाने से दिल्ली में नेता रहे मदनलाल खुराना को भाजपा ने मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन हवाला कांड में नाम आने के बाद कुर्सी छोड़नी पड़ी। उसके बाद दोबारा मंत्री नहीं बनाए जाने से वह आडवाणी से खफा हो गए। पार्टी छोड़नी पड़ी। वाजपेयी के दखल से वापस लौटे। राजस्थान के राज्यपाल बने, लेकिन केंद्र में मंत्री बनने की इच्छा से वह राजभवन छोड़कर आ गए, लेकिन मंत्री नहीं बन पाए तो फिर अपनी पार्टी बना ली। आजकल फिर से भाजपा में हैं।