Sumo Pahalwan...Wah bhaai Wah!
Summary rating: 5 stars
1 समीक्षा
विजिट्स
:
64
शब्द:
300
प्रकाशन तिथि: जनवरी 22, 2008
खेल सूमो पहलवान...वाह भाई वाह!
कुश्ती खेल ही तो है.एक मनोरंजन भी है. इसमें भले ही प्रतिद्वंदी को धाराशायी करने के लिए लातों और मुक्कों का इस्तेमाल किया जाता हो....यह एक मनोरंजन ही है. इसमें खेल-भावना ही है!
जापान के अतिप्राचीन ग्रंथ ''निहोन शोकी'' का हवाला दिया जाता है; कहते है कि सुमो नाम का एक पहलवान था जो ''सुमाइ'' नामक अखाड़े में उतरा था. आगे चलकर खेल में बदलाव आते गए और इसके खिलाड़ी ''सूमो'' कहलाने लगे.
सोलहवी शताब्दी में जापान के ''ओडा नोब्यूनागा'' में पहला टूर्नामेंट आयोजित हुआ था. जैसे जैसे इस खेल को गंभीरता से लिया जाने लगा, प्रोफेशनल सूमो की गिनती में भी इज़ाफा होता चला गया.
आजकल मकूची पहलवान सबसे मशहूर पहलवान माने जाते है. इन कुश्तीबाजों की भीड़ ''मोगाशिरा'' कहलाती है.इसमें करीबन सत्रह से अट्ठारह पहलवान होते है.मोगाशिरा से उपर की श्रेणी के पहलवान ''सन्याकू'' कहलाते है.जो नियमित रुप से कुश्तियां जीतते है. उन्हे ''योकोजुना'' याने कि महान कुश्तीबाज़ की उपाधि से नवाजा जाता है.
सूमो पहलवानों की उम्र कड़ी दिनचर्या और बेतरतीब खान-पान की वजह से 60 से 65 वर्ष के बीच की होती है.मोटापा ही इनका ह्र्दयघात कर देता है.ज्यादा मात्रा में शराब के सेवन से सूमो पहलवान अर्थराइटिस के शिकार भी हो जाते है.
सूमो पहलवानों का जीवन ऐसे ही समाप्त हो जाता है.
Sumo Pahalwan...Wah bhaai Wah! के बारे में अधिक समीक्षाएं